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लोगों को बीमार कर रही पानी में बढ़ी टीडीएस की मात्रा

सार

भूजल में टीडीएस (टोटल डिसॉल्वड सॉलिड्स) की मात्रा सुरक्षित पेयजल के लिए निर्धारित मानकों से कई गुना ज्यादा हो गई है। इससे तंत्रिका तंत्र रोग होते हैं।फ्लोराइड: जल में 1.2 मिग्रा प्रति लीटर से अधिक मात्रा वाले जल का नियमित सेवन करने से फ्लोरोसिस नामक रोग होता है। हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।नाइट्रेट: पीने वाले पानी में नाइट्रेट की मात्रा 50 मिग्रा प्रति लीटर से अधिक होने पर यह पीने लायक नहीं रह जाता है।आर्सेनिक: इसकी पेयजल में सामान्य मात्रा 0.01 मिग्रा प्रति लीटर होनी चाहिए।
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विस्तार
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बदायूं। शहर के कई इलाकों में भूमिगत पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि पीने के लायक नहीं रहा। भूजल में टीडीएस (टोटल डिसॉल्वड सॉलिड्स) की मात्रा सुरक्षित पेयजल के लिए निर्धारित मानकों से कई गुना ज्यादा हो गई है। ऐसे में लोग बीमार हो रहे हैं।
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जिले में लगातार गिर रहे भूजल स्तर से पानी में अशुद्धियों की मात्रा बढ़ रही हैं। इससे यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। शहर में कई जगह भूजल में टीडीएस की मात्रा मानक से कई गुना अधिक पाई गई है। जानकारों के अनुसार शुद्ध पानी में टीडीएस की मात्रा 100 से 150 मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए, जो बढ़कर 2000 से 2200 के घातक स्तर पर पहुंच गई है।
वाटर एक्सपर्ट रामदास सिंह ने बताया कि शहर के कई इलाकों में पानी अशुद्ध है। इसका प्रमुख कारण अपशिष्ट पदार्थों के मिश्रण का बढ़ना है। इसमें सबसे ज्यादा टीडीएस नई सराय नई बस्ती, लोची नगला की आदि की तरफ है। उसके बाद में सिविल लाइन, नेकपुर, सोथा, कबूलपुरा, गांधी ग्राउंड के आसपास है। सबमर्सिबल के पानी का टीडीएस करीब छह सौ से साढ़े आठ सौ के बीच में आ रहा हैं।
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शरीर पर पड़तेे हैं ये दुष्प्रभाव
- आयरन : जल में आयरन की मात्रा सामान्य 0.3 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा हो जाती है, तो उसके स्वाद में परिवर्तन हो जाता है। इससे हीमोक्रोमैरोसिस बीमारी होती है।
मैग्नीज: पेयजल में सामान्य मात्रा 0.05 मिग्रा प्रति लीटर से अधिक होने पर यह मानव शरीर को नुकसान पहुंचाता है। इससे तंत्रिका तंत्र रोग होते हैं।
फ्लोराइड: जल में 1.2 मिग्रा प्रति लीटर से अधिक मात्रा वाले जल का नियमित सेवन करने से फ्लोरोसिस नामक रोग होता है। हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।
नाइट्रेट: पीने वाले पानी में नाइट्रेट की मात्रा 50 मिग्रा प्रति लीटर से अधिक होने पर यह पीने लायक नहीं रह जाता है।
आर्सेनिक: इसकी पेयजल में सामान्य मात्रा 0.01 मिग्रा प्रति लीटर होनी चाहिए। अधिक होने पर त्वचा रोग की समस्या होने लगती है।
शहर में 26 ट्यूबवेल हैं। सभी की बीच-बीच में टीडीएस की जांच करते रहते हैं। हाल ही में वाटर वर्क्स में स्थित ट्यूबवेल का टीडीएस 220 आया था, जबकि कोतवाली के पास स्थित ट्यूबवेल का टीडीएस 250 था। ऐसे में सभी ट्यूबवेल का औसतन टीडीएस दौ से 350 के आसपास रहता है। -पुष्पेंद्र, एई, नगर पालिका, बदायूं
अगर पानी में 100 से 150 मिली ग्राम प्रति लीटर टीडीएस हैं, तो वह पानी सेहत के लिए ठीक है। शरीर के लिए क्लोरीन के साथ-साथ मैग्नीशियम, कैल्शियम व सोडियम जैसे तत्व पानी में जरूरी होते हैं। इसलिए टीडीएस की जांच जरूरी होता है। इससे पानी की शुद्धता का पता चलता है। पानी में टीडीएस की मात्रा ज्यादा होने से मांसपेशियों में दर्द, पथरी, लिवर, किडनी, पेट संबंधित बीमारियों का खतरा बन जाता है। -डॉ. अरुण यादव, सीनियर फिजीशियन
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