बदायूं। बिसौली तहसील क्षेत्र के गांव संग्रामपुर के डाकपाल द्वारा ग्राहकों की 50 लाख से ज्यादा की रकम डकारने के मामले में अभी ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी कि दूसरी तरफ एक और डाकपाल का घोटाला सामने आ गया। सहसवान क्षेत्र के नाधा में तैनात डाकपाल के विभागीय पासवर्ड की मदद से निलंबित चल रहे एक डाकपाल ने डाकघर के खाते में ही सेंध लगा दी। फर्जी खाते खोलकर विभाग के खाते से सवा लाख रुपये उनमें ट्रांसफर कर लिए। पेटीएम की मदद से 67 हजार रुपये निकाल भी लिए। वर्तमान डाकपाल को जब भनक लगी तब उसने पुलिस को सूचना दी जिसके बाद आरोपी डाकपाल को हिरासत में ले लिया गया।
नाधा के डाकघर में ओमेंद्र सिंह भदौरिया डाकपाल के पद पर तैनात हैं। कुछ महीने पहले विभाग की ओर से सहसवान तहसील में एक कैंप लगा था जिसमें अधिकारियों ने ज्यादा से ज्यादा खाते खोलने पर जोर दिया था। सभी डाकपालों को निर्देश दिए थे कि वे लोगों को डाकघर से जोड़ें। कार्य में पारदर्शिता रहे, इसके लिए विभाग ने डाकपालों को एक सिम और मोबाइल फोन दिया था। चूंकि खाते ऑनलाइन खुलने की प्रक्रिया थी इसलिए डाकपाल ओमेंद्र उस प्रक्रिया को समझ नहीं पा रहे थे। इसके लिए वह अपने बेटे आशीष को कैंप में ले गए थे। इस कैंप में कुछ खाते भी खुले थे। डाकपाल के मुताबिक कैंप में मौजूद एक ओवरसीयर ने उसके बेटे को आईपीपीबी (इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक) आईडी का पासवर्ड डालते हुए देख लिया था। डाकपाल का आरोप है कि ओवरसीयर ने इसे निलंबित डाकपाल हरीश को बता दिया। हरीश बदायूं के करेंगी गांव के पास पड़ने वाले गांव महमूदपुर जो कि बरेली जिले में पड़ता है, उसमें डाकपाल के रूप में तैनात था। यह मूलरूप से सम्भल जिले के थाना हयातनगर क्षेत्र का रहने वाला है, तथा हेराफेरी के मामले में तीन चार माह से निलंबित चल रहा है।
डाकपाल ओमेंद्र सिंह के अनुसार कुछ दिन पहले उन्हें पता चला कि हरीश ने पांच लोगों के फर्जी खाते डाकघर में खुलवाए। इनमें गुन्नौर क्षेत्र के गांव गोठना निवासी राम किशोर और राम सिंह के अलावा एक-एक अलीगढ़, सम्भल और बुलंदशहर के हैं। इसके बाद आरोपी ने हासिल किए गए पासवर्ड का प्रयोग करके 27 नवंबर को इनके खातों में विभाग के 25-25 हजार रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद पेटीएम से खाता जोड़कर 67 हजार रुपये निकाल भी लिए। डाकपाल की शिकायत पर आरोपी डाकपाल को सम्भल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी ने ऐसेे किया घोटाला
डाकपाल ओमेंद्र के अनुसार हरीश ने जिन लोगों के नाम से खाते खुलवाए थे, उसने उन लोगों से कहा था कि वह केंद्र सरकार की ओर से चल रही एक योजना के तहत उन्हें डेढ़ डेढ़ लाख रुपये दिलाएगा। इसलिए वह अपने आधार, फोटो आदि दे दें। हरीश ने खाते खोलने के लिए दो फर्जी सिम भी खरीदे थे। उन्हीं के नंबर इन लोगों के खातों में अंकित किए थे ताकि ओटीपी प्राप्त हो जाए। चूंकि पासवर्ड उसके पास था। इसलिए खाते खुलवाने के बाद उसने विभागीय पैसा खातों में भिजवा दिया। उन खातों के बारे में हरीश को ही जानकारी थी, जिससे उसने पेटीएम के माध्यम से एक दुकानदार को 67 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए और बाद में उन्हें दुकानदार से ले लिया।
आरोपी बोला- ओवरसीयर पर आ रहे हैं नौ लाख, उसी ने दी थी सलाह
- ओमेंद्र के अनुसार, जब उन्हें इस बात का पता लगा तो उन्होंने अपने स्तर से जानकारी हासिल की, जिसके बाद उन्हें इस मामले में हरीश की जानकारी हुई। शुक्रवार को वह कुछ अन्य डाकपालों को लेकर सम्भल स्थित उसके गांव हयातनगर पहुंचा और थाना पुलिस को तहरीर दी। हयातनगर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हरीश को हिरासत में ले लिया। हयातनगर एसओ रविंद्र कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने पर शुक्रवार दोपहर में आरोपी को हिरासत में ले लिया था, साथ ही जरीफनगर पुलिस को इसकी सूचना दे दी गई है। इधर हिरासत मे आरोपी हरीश ने पुलिस को बताया कि उसके एक विभागीय ओवरसीयर पर नौ लाख रुपये आ रहे हैं, जिस पर उसी ने उसे ऐसा करने की सलाह दी थी। उसने उससे कहा था कि वह एक पासवर्ड देगा तब वह कितना भी धन निकाल सकता है। इसकी सलाह पर ही उसने पांच खाते खुलवाए और 25-25 हजार रुपये उन खातों में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद 67 हजार रुपये पेटीएम के माध्यम से निकाल लिए।
जल्द नहीं होता खुलासा तो निकल जाते लाखों रुपये
विभागीय कर्मचारियों का कहना है यदि डाकपाल ओमेंद्र भदौरिया को इस मामले की जानकारी जल्द नहीं होती तो आरोपी हरीश पता नहीं कितने रुपये खातों से निकल लेता। इधर मामले का खुलासा होने पर ओमेंद्र ने पासवर्ड ब्लॉक करा दिया है।
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मैं आज गोरखपुर में हूं। पहले अधिकारियों से पूरी जानकारी करेंगे और फिर जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। यदि ऐसा हुआ है तो वह गलत है।
संजय सिंह, पोस्टमास्टर जनरल, जोन बरेली