उसहैत क्षेत्र में तैनात एक लेखपाल ही सुनियोजित तरीके से गरीबों की जमीनों पर दूसरे प्रांत के काश्तकारों का कब्जा करा रहा है। जमीन जाने पर एक युवा काश्तकार की सदमे से मौत भी हो चुकी है। क्षेत्र के एक जिला पंचायत सदस्य ने एसडीएम को पूरे मामले से अवगत कराते हुए लेखपाल को तुरंत हल्के से हटाने और गरीबों की जमीनें वापस दिलाने की मांग की है।
भाकियू के जिला प्रवक्ता हवलदार कश्यप और जिला पंचायत सदस्य सुनीता कश्यप ने बताया कि गंगा की कटरी में तैनात एक लेखपाल सरकारी काम के बजाए बाहरी पार्टियों को जमीनों का सौदा कराने का कार्य कर रहा है। यह लेखपाल गंगा में डूबी हुई अथवा रेतीली जमीनों का सौदा स्वयं काश्तकारों से मामूली दामों में करता है। फिर बाहरी पार्टियों को कृषि योग्य भूमि बताकर ऊंचे दामों में बेच देता है। बैनामा होने के बाद खुद ही बिकी हुई जमीन की पैमाइश करता है। पैमाइश के नाम पर भी अच्छी खासी रकम वसूलता है और अपने कृत्य को छिपाने के लिए गरीब काश्तकारों की जमीनें नाप कर दे देता है। अपने हल्के के अलावा दूसरे हल्कों की भी जमीनें नाप देता है। जिन जमीनों पर तीन पीढ़ियों से काश्तकार काबिज थे लेखपाल की मेहरबानी से अब उन जमीनों पर बाहरी पार्टियों का कब्जा है। स्थानीय काश्तकारों को बताया जाता है कि तुम्हारी जमीन तो गंगा में समाई हुई है लिहाजा, तुम गलत नंबर जोत रहे थे। यदि कोई काश्तकार अड़ जाता है तो स्थानीय दबंगों की मदद से उसकी अकड़ ढीली कर दी जाती है।
इसी कड़ी में खजुरा नगला गांव के युवा काश्तकार सुरेंद्र पुत्र हिमाचल कश्यप की जमीन पर कब्जा करा दिया गया जबकि सुरेंद्र का परिवार सौ साल से भी अधिक समय से इस जमीन पर काबिज था। सुरेंद्र ने अधिकारियों समेत क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों के यहां भी मिन्नतें कीं लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। अंतत: 35 साल की आयु में उसकी दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।
जिला पंचायत सदस्य सुनीता कश्यप ने एसडीएम से लेखपाल को जनहित में अविलंब हटाकर किसी ईमानदार लेखपाल को अथवा उच्चाधिकारी से पैमाइश कराकर गरीबों की छिनी हुई जमीनें वापस दिलाने की मांग की है।
जिला पंचायत सदस्य सुनीता कश्यप और भाकियू नेता हवलदार कश्यप की शिकायत पर आरोपों की जांच कराने का निर्देश दे दिया है। आरोप सही पाए जाते हैं तो लेखपाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जमीनें भी वास्तविक हकदारों को मिलेंगी। -ओपी तिवारी एसडीएम दातागंज