मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर
आवंटित तालाबों पर निर्माण हो रहे हैं। दातागंज तहसील में करीब एक दर्जन
तालाब ऐसे हैं। इनको पाट लिया गया है। तमाम तालाबों का पट्टा तो मत्स्य
पालन का है लेकिन यहां खेती हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद
तालाबों को खत्म किया जा रहा है।
जिले की दातागंज तहसील गंगा और रामगंगा
की कटरी से जुड़ी हुई है। ऐसे में यहां तालाबों की तादाद भी काफी ज्यादा
थी। तहसील क्षेत्र में मल्लाह बिरादरी की तादाद भी काफी है। इन तालाबों को
तहसील प्रशासन की ओर से मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर दिया है। गौर करने
वाली बात यह है कि मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर लिए गए तालाबों पर खेती हो
रही है। इनमें कई तालाब तो ऐसे हैं कि इनका अस्तित्व ही खत्म हो गया है।
तहसील प्रशासन भी इन तालाबाें के स्थलीय सत्यापन की जरूरत नहीं समझता। बिना
स्थलीय सत्यापन के तालाबों के पट्टे कर दिए जाते हैं। राजस्व विभाग की
अनदेखी के चलते तहसील क्षेत्र में करीब एक दर्जन बड़े तालाबों पर खेती कराई
जा रही है। सबसे बड़ा करीब तीन सौ बीघा का ढका दयोरारा के तालाब के 80
फीसदी हिस्से में खेती हो रही है। यहां गौर करना जरूरी है कि जल स्रोतों के
संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। बावजूद इसके
तहसील प्रशासन सब कुछ नजर अंदाज कर रहा है।
इन तालाब पर हुए कब्जे
तालाब रकबा
मैरी बजर मैरी 125 बीघा
ढका दियोरारा 300 बीघा
हथिनी भूड़ 25 बीघा
सराय 35 बीघा
काला कूंढा 12 बीघा
पापड़ 30 बीघा
पलिया गूजर 30 बीघा
घिलौर 84 बीघा
कस्बा दातागंज 40 बीघा
दियोरिया 14 बीघा
तालाबों
को पाट कर निर्माण और खेती की बात मेरी जानकारी में नहीं है। अगर ऐसा है
तो इसकी जांच कराकर पट्टों का आवंटन रद्द किया जाएगा। -ओपी तिवारी,
तहसीलदार, सदर