बदायूं। आज गणतंत्र दिवस है, यानि देश के संपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव का महत्वपूर्ण दिन। कटरी के कई गांवों में भी इस दिन को लेकर खासा उल्लास है। चुनावी माहौल में लोग यहां गणतंत्र को पर्व की तरह मनाने जा रहे हैं और मतदान भी उसी शिद्दत से करने का दावा करते हैं। गांव के उम्रदराज लोग डेढ़ दशक पहले तक के उस दौर को याद करके सिहर जाते हैं जब चुनाव के दिनों में परोक्ष अपरोक्ष तरीके से दस्यु सरगनाओं के फरमान आ जाते थे। कल्लू के बाद नरेशा धीमर गैंग की बादशाहत खत्म होने के साथ कटरी आतंक से मुक्त हुई और विकास का पहिया घूमने लगा।
कटरी में यूं तो कई डकैतों का राज रहा पर सबसे ज्यादा दहशत शाहजहांपुर के परौर क्षेत्र के दस्यु सरगना कल्लू यादव की रही। कल्लू का आतंक दातागंज रामगंगा कटरी के गांव बेलाडांडी, चापरकौरा, करनपुर, लालपुर खादर, कुंडरा खरसाई, कुंडरा मजरा, हर्रामपुर, धनौरा, नगरिया व भाऊ नगला समेत कई गांवों व इनसे सटे खेतिहर इलाके में रहा।
उसहैत क्षेत्र के गंगा की कटरी के कई गांव भी कई बार उसके आश्रयस्थल व आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बनते थे। इन सभी इलाकों में चुनाव के वक्त भी कल्लू व अन्य डकैत गिरोहों की सक्रियता बढ़ जाती थी। कई बार सियासी लोगों पर इन दस्यु गिरोहों को शरण देने का इल्जाम लगता रहा तो यह भी तोहमत लगी कि गांवों में इनके डर के बहाने चुनावी समीकरण भी साधे जाते हैं। प्रधानी चुनावों में खासतौर से इस तरह के गिरोहों पर किसी खास प्रत्याशी की मदद या किसी को चुनाव में बैठाने की चर्चा भी कटरी के गांवों में खूब होती रही। वक्त के साथ डकैतों को पुलिस ने ढेर कर दिया। गांवों में शिक्षा का प्रसार हुआ और सड़कें बनने से विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ।
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ये बोले ग्रामीण
कटरी में कई डकैत गिरोहों का आतंक रहा है। कल्लू के बारे में मशहूर था कि वह किसानों को कटरी की पतेल आदि नहीं काटने देता था। कई बार ऐसा करने पर वह किसानों को धमकाता था। किसानों के दिल में डर बना रहता था। आज इस तरह की कोई समस्या नहीं है।
- अरुण सिंह, नगरिया खनू
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वह कटरी का सबसे खराब समय था। अब गांवों के छिटपुट विवादों को छोड़ दें तो बाकी लोग मेहनत से खेती और बच्चे पढ़ाई व दूसरे रोजगार कर रहे हैं। यूपी 112 व एंबुलेंस 108 जैसी सेवाओं ने भी गांवों की स्वास्थ्य व अपराध संबंधी समस्याएं निपटा दी हैं। कटरी के गांव तक सड़कें बनी हैं और रोजगार के साथ बढ़े हैं।
- छोटे सिंह यादव, देवचरी
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उन दिनों हम लोग खेतों पर जाने से बचते थे। रात में खेतों पर सोने का तो कोई मतलब ही नहीं था, भले ही पशु पूरी फसल चल जाएं। आज माहौल पूरी तरह बदल गया है। गांव के तमाम लोग अब फसलों की रखवाली खेतों पर रहकर ही करते हैं।
- लाल रत्नाकर सिंह, बिहारीपुर
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कटरी क्षेत्र से पुलिस ने बदमाश गैंग का सफाया किया तो इस अछूते इलाके में खेती किसानी को बल मिला। हम लोग कई साल से अनुभव कर रहे हैं कि सामान्य खेतों की फसल के मुकाबले कटरी क्षेत्र की जमीन ज्यादा उपजाऊ साबित हो रही है। यहां के खेतों में सामान्य की बजाय फसल ड्योढी हो रही है और लापग भी कम है।
- शिव सिंह मुखिया, रोहरी
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कल्लू-नरेशा का खात्मा करने वाले राणा बोले- तब पुलिस भी गश्त से डरती थी
कल्लू यादव व नरेशा धीमर का एनकाउंटर करने वाली टीम के मुख्य नायकों में शामिल विजय राणा फिलहाल जेपी नगर के सीओ सिटी हैं। वह उन दिनों को याद करते हैं तो डकैत गिरोहों की दहशत से लेकर सफाए तक के कई किस्से जेहन में ताजा हो जाते हैं।
वह बताते हैं कि कई अपहरण करने और पुलिसवालों की जान लेने वाले कल्लू को मारने के लिए तब अधिकारियों ने टीम को पूरी छूट और हर जरूरी संसाधन दे रखा था। हालांकि नेटवर्क के मामले में कल्लू अक्सर पुलिस को दांव मार जाता था। उसे हम लोगों के कटरी में आने की सूचना जितनी तेजी से मिलती उसके बारे में उतना तेज इनपुट पुलिस को नहीं मिल पाता था। गांव के लोग दहशत में जुबान नहीं खोलते थे। कई जगह पुलिसकर्मी ही रात की गश्त को नहीं निकलते थे। धीरे-धीरे करके पुलिस ने ग्रामीणों का भरोसा जीता और उन्हें यकीन दिलाया कि डकैतों के सफाए में ही उनका व समाज का भला है। पुलिस का सूचना तंत्र बढ़ा तो 16 जनवरी 2006 को कल्लू का सफाया संभव हुआ। बाद में नरेशा को भी पुलिस ने मार गिराया। राणा ने बताया कि भरोसा बड़ी चीज है। पुलिस को जनता का भरोसा कायम रखने के लिए काम करना चाहिए। जनता को भी चाहिए कि वह समाज विरोधी गति वधियों के बारे में पुलिस को जानकारी दे। संवाद