बदायूं। मुलायम सिंह और मायावती को जनप्रतिनिधि बनाने वाले बदायूं जिले में कई कद्दावर नेता मंत्रीमंडल का हिस्सा रह चुके हैं। इनमें दातागंज के बाबू हरिश्चंद्र सिंह का नाम तो चौधरी चरण सिंह की सरकार गिरने के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भी शामिल रहा। यह बात अलग है कि इस बार किसी भी विधायक को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली।
यहां बता दें कि अप्रैल 1967 से फरवरी 1968 तक चौधरी चरण सिंह मुख्यमंत्री रहे। चरण सिंह ने रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी दातागंज विधायक बाबू हरिश्चंद्र सिंह को कानून मंत्री बनाया था। इसके अलावा बिसौली के श्योराज सिंह, बिल्सी के भोलाशंकर मौर्य, शहर से विधायक रहे श्रीकृष्ण स्वरूप वैश्य, श्रीकृष्ण गोयल, प्रमिला भदवार, विमल कृष्ण अग्रवाल, उसहैत से विधायक रहे भगवान सिंह शाक्य, बनवारी सिंह यादव, सहसवान से ओमकार सिंह, बिनावर से भूपेंद्र सिंह भी मंत्रीमंडल का हिस्सा रहे । इनमें कई का तो सरकार में खासा रसूख रहा। बाबू हरिश्चंद्र सिंह, भोलाशंकर मौर्य, श्रीकृष्ण गोयल, कृष्ण स्वरूप वैश्य, बनवारी सिंह यादव, श्योराज सिंह दिवंगत हो चुके हैं। इनमें कई के परिवार सक्रिय राजनीति में हैं तो कई के परिवारों ने अब राजनीति से दूरी बना ली है। फिलाहल महेश गुप्ता का कार्यकाल खत्म होने के बाद इस बार नए मंत्रिमंडल में बदायूं को मौका नहीं मिला है। (संवाद)
-
शहर सीट से दो बार मंत्री बने कृष्ण स्वरूप वैश्य
जिले के कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले कृष्ण स्वरूप वैश्य कई बार शहर सीट से विधायक रहे। पहली बार वह 1970 में त्रिभुवन नारायण सिंह की गठबंधन सरकार में कृषि राज्यमंत्री बने। त्रिभुवन नारायण सिंह किसी सदन के सदस्य नहीं थे। उप चुनाव भी हार गए तो करीब पांच महीने में ही सरकार गिर गई। कृष्ण स्वरूप वैश्य दूसरी बार कल्याण सिंह सरकार में 1991 से 1993 तक पंचायती राज राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रहे। उनके कार्यकाल में जिले में कई विकास कार्य हुए।
-
मिनी मुख्यमंत्री के रूप में जाने जाते थे बनवारी सिंह
उसहैत विधानसभा से दो बार विधायक और बाद में बदायूं सीट से एमएलसी रहे बनवारी सिंह यादव मुलायम सिंह यादव के काफी करीबी थे। कोऑपरेटिव की राजनीति से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले बनवारी सिंह यादव 2004 से 2007 तक मुलायम सिंह यादव सरकार में नागरिक उड्डयन, प्रोटोकाल और राज्य संपत्ति विभाग के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री रहे। प्रदेश में सपा सरकार के दौरान कई बार उन्होंने निगमों के अध्यक्ष पदों को भी संभाला जिनमें राज्यमंत्री का दर्जा उनके पास रहा।
-
तीन मुख्यमंत्रियों की सरकार में मंत्री रहे भगवान सिंह
पहली बार 1972 में शेखूूपुर सीट से विधानसभा पहुंचे भगवान सिंह शाक्य ने तीन मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया। पहली बार वह 1997 में कल्याण सिंह सरकार में कृषि राज्यमंत्री बने। यह कार्यकाल दो साल का रहा। इसके बाद 1999 में राम प्रकाश गुप्त की सरकार में कृषि राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार का पद संभाला। 2000 से 2002 तक वह राजनाथ सिंह सरकार में राष्ट्रीय एकीकरण क्रियान्वयन राज्यमंत्री रहे। भगवान सिंह ने भाजपा सरकार में तीन मुख्यमंत्रियो के साथ काम किया।
-
बिनावर से पहली बार जीते भूपेंद्र तो माया ने बनाया राज्यमंत्री
लगातार चार बार भाजपा के कब्जे में रही बिनावर सीट पर 2002 में बसपा के भूपेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की। प्रदेश में बसपा की सरकार बनी। मायावती ने भूपेंद्र सिंह को राजनीतिक पेंशन राज्यमंत्री बनाया। सरकार में मंत्री पद संभालने वाले भूपेंद्र सिंह कुर्मी बिरादरी के बदायूं से पहले मंत्री थी। यह सरकार अगस्त 2003 में गिर गई। भूपेंद्र सिंह ने इसके बाद बसपा, सपा, महान दल से भी चुनाव लड़े, लेकिन वह चुनाव नहीं जीत सके। 2007 के चुनाव के बाद बिनावर सीट ही खत्म हो गई।
-
अखिलेश सरकार में पंचायती राज मंत्री रहे ओमकार सिंह
ओमकार सिंह यादव 1991 में पहली बार जनता दल के टिकट पर सहसवान से विधायक चुने गए। इसके बाद वह लगातार विधायक रहे। इसके बाद के चुनाव उन्होंने सपा से लड़े। 2007 के अलावा कभी कोई चुनाव नहीं हारे। मोदी-योगी लहर में भी सहसवान सीट सपा कब्जे में है। 2012 में प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार बनी। अखिलेश ने अक्तूबर 2015 में ओमकार सिंह यादव को पंचायती राज राज्यमंत्री बनाया। वह 2017 तक राज्यमंत्री रहे।
-
तीन बार मंत्री रहे भोलाशंकर मौर्य, कई काम कराए
बिल्सी विधानसभा से निर्वाचित रहे स्व. भोलाशंकर मौर्य प्रदेश की सत्ता में तीन बार मंत्री रहे थे। दरअसल बिल्सी तब सुरक्षित सीट थी जहां करीब पांच बार केशवराम विधायक चुने गए। उनके निधन के बाद यहां उनके पुत्र भोलाशंकर मौर्य ने 1984 में पहली बार चुनाव लड़ा और जीता। मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने भोलाशंकर मौर्य को बाढ़ खंड विभाग का राज्यमंत्री बनाया। 1987 में सियासत में आए परिवर्तन के बाद वीर बहादुर सिंह मुख्यमंत्री बने तो उन्हें लोक निर्माण विभाग का राज्यमंत्री बनाया गया। तब भोलाशंकर ने नगर में एक बाईपास और बिल्सी को बदायूं से सीधे जोड़ते हुए बदायूं-बिजनौर राज्यमार्ग संख्या 51 का दर्जा दिलाया। 1997 में प्रदेश में मायावती सरकार में उन्हे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में राज्यमंत्री बनाया।
---
मुलायम सरकार में वित्त राज्यमंत्री रहे विमलकृष्ण
वर्ष 2002 में बदायूं विधानसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव जीते उझानी निवासी विमलकृष्ण अग्रवाल का उसी साल के अंत तक पार्टी से मोहभंग हो गया। मायावती की सरकार गिरी तो सपा के मुलायम सिंह यादव ने प्रदेश में सरकार बनाई। सपा में शामिल विमल कृष्ण अग्रवाल को प्रदेश का वित्त राज्यमंत्री बनाया गया। सपा में खास पहचान कायम कर चुके अग्रवाल का कार्यकाल बेहतर रहा था। खासकर बिजली और सड़कों को लेकर उनके कार्यकाल को याद किया जाता है।
-
जनरेटर मंत्री के नाम से मशहूर थे श्रीकृष्ण गोयल
प्रदेश की राजनीति में एक दौर बाबू श्रीकृष्ण गोयल का रहा था। कांग्रेस में उन्हें कद्दावर नेता माना जाता था। वह बदायूं से जीतने के बाद 80 के दशक में प्रदेश सरकार में पहली बार राज्यमंत्री बने। कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए मशहूर गोयल के बारे में यहां तक कहा जाता था कि जब वह लखनऊ से घर लौटते तो नगर में बिजली गुल नहीं हो सकती थी। उन्हें जनरेटर मंत्री भी कहा जाने लगा था। बाद में हालांकि उनका राजनीतिक ग्राफ तेजी से गिरा। विधानसभा में पहुंचने के लिए वह जनता दल में भी गए लेकिन हार गए।
-
संयुक्त राष्ट्र के सत्र को संबोधित किया था मंत्री प्रमिला भद्वार ने
एक समय गांधी परिवार की करीबियों में शुमार प्रमिला भद्वार मेहरा बदायूं विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर चुनावी जीत चुकी हैं। वर्ष- 1984 में वह नारायणदत्त तिवारी की अगुवाई वाली प्रदेश में पर्यटन उप मंत्री रहीं। अपने कार्यकाल में उन्होंने बदायूं और कछला में पर्यटक आवास गृह का निर्माण भी कराया। सिंचाई के लिए नलकूपों की संख्या में इजाफा हुआ लेकिन अगले विधानसभा चुनाव में उन्हें भी हार का सामना करना। वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्य भी रह चुकी हैं। पूर्व पीएम राजीव गांधी के भेजे शिष्टमंडल में शामिल महिला नेता भदवार ने संयुक्त राष्ट्र के सत्र को भी उन्होंने संबोधित किया था।
-
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रहा जज साहब का नाम
दातागंज सीट से तीन बार विधायक रहे रिटायर्ड जज हरिश्चंद्र सिंह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रहे। चौधरी चरण सिंह 1967 में मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने हरिश्चंद्र सिंह को कानून मंत्री बनाया। चौधरी चरण सिंह 1968 तक मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। बुजुर्ग बताते हैं कि इसके बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे हरिश्चंद्र सिंह का नाम था। हरिश्चंद्र सिंह के बेटे अवनीश कुमार सिंह भी तीन बार दातागंज से विधायक रहे। उनका परिवार अब राजनीति से दूर है।
----
मुलायम से चुनाव लड़कर चमके महेश गुप्ता
1996 में मुलायम सिंह यादव के खिलाफ सहसवान सीट से चुनाव लड़कर दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के महेश गुप्ता पहली बार 2007 में शहर सीट से विधायक चुने गए। 2012 में वह सपा के आबिद रजा से हार गए, लेकिन 2017 और इसके बाद 2022 में लगातार दूसरी बार विधायक बने। 2017 में प्रदेश में योगी सरकार बनी। योगी सरकार ने अगस्त 2019 में मंत्री मंडल का विस्तार किया तो महेश गुप्ता को नगर विकास और गरीबी उन्मूलन राज्यमंत्री बनाया। 1993 में कृष्ण स्वरूप वैश्य के बाद जिले में भाजपा के मंत्री महेश गुप्ता ही बने।
----
जिले से पहले मंत्री बने थे बिसौली के श्योराज सिंह
बिसौली के गांव मन्नूनगर के रहने वाले श्योराज सिंह यादव आजादी के दौर के एमएससी एलएलबी थे। वह 1950 में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। पहली बार 1952 में बिसौली से विधायक चुने गए और पंडित गोविंद बल्लभ पंत की सरकार में कैबिनेट कृषि मंत्री बने। इसके बाद दो बार और विधायक चुने गए। हर बार उनको मंत्री मंडल में जगह मिली। इसके अलावा वह यूपी एग्रो के पहले निदेशक और फिर चेयरमैन बने। उन्हें प्रदेश में बड़े कृषि सुधारों के लिए जाना जाता है। उनके परिवार के लोग अब क्षेत्र में नहीं रहते। अधिकतर लोग दूसरे शहरों में शिफ्ट हो चुके हैं। संवाद