बदायूं। दूसरे चरण में सोमवार को जिले की छह विधानसभा सीटों पर मतदान के साथ ही प्रत्याशियों की किस्मत 10 मार्च तक ईवीएम में कैद हो जाएगी।
यूं तो जिले की छह सीटों पर कुल 61 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस के 24 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होना है। कांग्रेस अपने राजनीतिक वजूद को बचाए रखने के लिए मैदान में दिख रही है। सहसवान सीट पर रापद प्रत्याशी कुणाल यादव की स्थिति भी कमजोर नहीं है। ज्यादा लोगों की दावेदारी होने की वजह से भाजपा और सपा को भितरघात का खतरा सता रहा है। शनिवार को चुनाव प्रचार थमने से पहले राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी। सभी प्रमुख प्रत्याशी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। राजनीतिक दलों की चुनाव प्रबंधन टीमें रूटों को बनाने, बागियों को साधने और भितरघात रोकने में जुटी हैं।
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भाजपा : जिले की सभी छह सीटें जीतने का दावा
भाजपा का दावा है कि 2017 के चुनाव में पार्टी ने जिले की छह में पांच सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार छह की छह सीट पर पार्टी प्रत्याशी जीतेंगे। 2014, 2017 और 2019 की तरह मतदाता भाजपा के साथ हैं। मोदी-योगी सरकार की कल्याणकारी और विकास योजनाओं के साथ माफिया, गुंडों पर अंकुश का पार्टी प्रत्याशियों को पूरा लाभ मिलेगा। बूथ स्तर तक पार्टी का मजबूत संगठन है तो मुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, डिप्टी सीएम, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जिले में कई सभाएं कर चुके हैं। सभाओं में उमड़ी भीड़ से साफ है कि भाजपा की जीत होगी।
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सपा : महान दल-रालोद गठबंधन, भाजपा के खिलाफ नाराजगी
जिला सपा का गढ़ रहा है। इस बार सपा का महान दल और रालोद से गठबंधन है। पार्टी का दावा है कि प्रदेश में भाजपा विरोधी लहर है। मतदाता भाजपा से नाराज है। सपा सरकार में जिले में हुए विकास कार्यों को मतदाता अब भी याद करता है। पांच साल के भाजपा सरकार के कार्यक्रम में विकास थमा रहा। पार्टी को उम्मीद है कि मौर्य, शाक्य, कुशवाहा, जाट के साथ अन्य पिछड़ी जातियां भी सपा के साथ हैं। ब्राह्मण मतदाताओं की नाराजगी भी भाजपा पर भारी पड़ेगी। इसका पूरा लाभ सपा को मिलेगा। पार्टी सभी छह सीट जीतेगी।
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बसपा : सोशल इंजीनिरिंग के सहारे मैदान में
बसपा का कोर वोट बैंक चुनाव में हार-जीत तय करता है। इस बार भी बसपा सोशल इंजीनियरिंग के साथ चुनाव मैदान में है। पार्टी ने वैश्य, क्षत्रिय के साथ दो मुस्लिम और एक शाक्य बिरादरी का प्रत्याशी मैदान में उतारा है। बिसौली सुरक्षित सीट है। पार्टी को उम्मीद है कि इसका पूरा लाभ मिलेगा। भाजपा और बसपा से नाराजगी का लाभ भी बसपा प्रत्याशियों को मिलेगा। इस तरह से सभी एक्टिज पोल को फेल कर बसपा ने 2007 में पूर्व बहुमत से सरकार बनाई थी उसी तरह इस बार भी सरकार बनेगी।
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कांग्रेस : बिना ठोस वोट बैंक के करिश्मे की उम्मीद
हालांकि, जिले में कांग्रेस के पास अब ठोस वोट बैंक नहीं है। कांग्रेस ने बिसौली, शहर और शेखूपुर सीट पर महिला प्रत्याशियों को उतारा है। दातागंज से मुस्लिम, सहसवान से यादव, बिल्सी से क्षत्रिय प्रत्याशी बनाया है। पार्टी को उम्मीद है कि इस बार चुनाव में समीकरण बदलेंगे। संगठन को लगता है कि मतदाताओं का रुख अब कांग्रेस की ओर है। इस चुनाव में कांग्रेस को करिश्मा होने की उम्मीद है। पार्टी नेताओं का दावा है कि कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शन होगा।
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रापद : तीन प्रत्याशी मैदान में, जीत का दावा
राष्ट्रीय परिवर्तन दल ने सहसवान में कुणाल यादव, दातागंज में सुभाष यादव और बिल्सी में डॉ. वीपी सिंह सोलंकी को प्रत्याशी बनाया है। कुणाल यादव रापद मुखिया डीपी यादव के बेटे हैं। रापद ने 2007 के चुनाव में सहसवान और बिल्सी सीट पर कब्जा किया था। रापद के मैदान में आने से सहसवान और बिल्सी सीट पर समीकरण प्रभावित हुए हैं। रापद नेताओं का दावा है कि इस चुनाव में पार्टी तीनों सीटों पर कब्जा करेगी। संवाद