बदायूं। राजनीतिक दल अब विधानसभा और लोकसभा चुनावों में महिलाओं को प्रत्याशी बनाने से बचने लगे हैं। इस बार चुनाव में कांग्रेस ने शहर, बिसौली और शेखूपुर सीट से महिलाओं को टिकट दिया है पर अगर भाजपा, बसपा और सपा की बात करें तो इन दलों ने कभी महिलाओं को प्रत्याशी नहीं बनाया। लोकसभा चुनाव में जरूर बसपा और भाजपा महिलाओं को मैदान में उतार चुकीं हैं। इसके विपरीत कभी जिले की राजनीति में महिलाओं का रसूख होता था।
जिले की राजनीति में लंबे समय तक शांति देवी यादव का दबदबा रहा। जरीफनगर निवासी बदायूं केसरी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चौधरी बदन सिंह यादव की इकलौती बेटी शांति देवी यादव की शादी बिसौली के गांव मोहकमपुर के चौधरी जगन्नाथ सिंह यादव से हुई थी। शांति देवी को राजनीति विरासत में मिली थी। उनके पिता दो बार विधायक और दो बार बदायूं से सांसद रहे थे। शांति देवी यादव 1962 से 1968 तक विधान परिषद की सदस्य रहीं। इसके बाद 1969 से 1977 तक सहसवान विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहीं। 1977 में संभल लोकसभा सीट से जनता पार्टी और 1984 में कांग्रेस से सांसद चुनी गईं। उनका परिवार अब राजनीति से बिल्कुल दूर है।
1985 में शहर सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुनी गईं प्रमिला भदवार मेहरा का भी खासा रसूख रहा। उनको भी राजनीति विरासत में मिली थी। उनके पिता पुरुषोत्तम लाल भदवार तीन बार शहर सीट से विधायक रहे थे। प्रमिला भदवार ने राज्य सरकार में पर्यटन व यातायात राज्यमंत्री का पद भी संभाला।
इसी क्रम में तीन बार कांग्रेस से दातागंज सीट से विधायक रहीं संतोष कुमारी पाठक का जिले की राजनीति में बड़ा रसूख था। उनको भी राजनीति पिता पंडित त्रिवेणी सहाय से विरासत में मिली थी। संतोष कुमार पाठक के बाद दातागंज सीट से कभी महिला विधायक नहीं चुनी जा सकीं। किसी राजनीतिक दल ने महिला को प्रत्याशी भी नहीं बनाया। विधानसभा में महिलाओं की बात करें तो 1989 में जिले से अंतिम महिला विधायक संतोष कुमारी पाठक ही चुनी गईं थीं।
भाजपा ने 1998 में शहर सीट से शांति देवी शाक्य को प्रत्याशी बनाया था। वह दूसरे नंबर पर रहीं। इसी प्रकार सन 2019 में डॉ. संघमित्रा मौर्य भाजपा के टिकट पर जीतीं।
बसपा ने 2014 के चुनाव में सुनीता शाक्य को आंवला लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया। वह भी चुनाव नहीं जीत सकीं। शांति देवी शाक्य पूर्व मंत्री भगवान सिंह शाक्य की और सुनीता शाक्य पूर्व विधायक सिनोद शाक्य की पत्नी हैं। (संवाद)
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जिपं अध्यक्ष की कुर्सी पर 20 साल से महिलाएं काबिज
लोकसभा और विधानसभा पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या भले कम हो, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर 20 साल से महिलाओं का कब्जा है। वर्ष 2000 में पहली बार चेतना सिंह यादव जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं थीं। वह दो बार अध्यक्ष रहीं। इसके बाद पूनम यादव, मधु चंद्रा, प्रीति सागर जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। मौजूदा अध्यक्ष वर्षा यादव हैं। गौर करने वाली बात यह है कि सभी महिला जिला पंचायत अध्यक्षों की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है। स्थानीय निकायों में भी महिलाओं की भागीदारी है। शहर से दीपमाला गोयल चेयरमैन हैं। उसहैत से सेनरा वैश्य, कुंवरगांव से शीतल गुप्ता, ककराला से नाजवी चेयरमैन हैं। क्षेत्र पंचायत की बात करें तो वजीरगंज में गुड्डो देवी, सालारपुर में विचित्रा देवी ब्लॉक प्रमुख हैं। अंबियापुर में रेखा देवी, उसावां में ममता, दहगवां में नीलम गुप्ता, बिसौली में सरला देवी, म्याऊ में विनीता कुमारी, समरेर में श्रद्धा सक्सेना और सहसवान में कृति सिंह ब्लॉक प्रमुख हैं।