ग्रामीण क्षेत्र में हैंडपंपों के लिए इस बार केंद्र ने हाथ खड़े कर दिए हैं। बजट नहीं मिला तो जिलों में हैंडपंपों के प्रस्ताव खत्म कर दिए गए। हैंडपंपों की बात करें तो केवल शहरी क्षेत्रों के लिए ही इस मद में 25 लाख रुपये मिले हैं।
गत वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आठ सौ हैंडपंप जनप्रतिनियों के माध्यम से मिल गए थे। इसमें दो एमएलसी और छह एमएलए शामिल हैं। प्रत्येक जनप्रतिनिधि को 100-100 हैंडपंप मिले थे। यह बात वर्ष 2013-14 की है लेकिन इस बार 2014-15 में ग्रामीण क्षेत्र में कोई हैंडपंप नहीं दिया गया है। बताते हैं कि असली राज है कि केंद्र सरकार ने ही इस बार हैंडपंपों से हाथ खड़े कर लिए हैं। केंद्र सरकार पाइप पेयजल योजना के तहत ही अब गांवों में ओवरहैड टैंक बनाकर शुद्ध पेयजल को प्राथमिकता दे रही है।
केंद्र सरकार का होता है 50 प्रतिशत
हैंडपंप योजना में केंद्र सरकार को 50 प्रतिशत योगदान होता है। प्रदेश सरकार 50 प्रतिशत अपनी ओर से लगाती है। इस प्रकार करीब 25 हजार रुपये की कीमत में एक हैंडपंप लगता है, जिसमें केंद्र और प्रदेश सरकार की आधी-आधी राशि होती है।
नगरीय क्षेत्र को मिला 25 लाख का बजट
देहात क्षेत्र में इस साल हैंडपंप नहीं लगेंगे। केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र को जहां कोई योगदान नहीं किया है, वहीं नगरीय क्षेत्रों में योगदान है। इसके लिए बदायूं जिले को मात्र 25 लाख का बजट मिला है। हालांकि इसके लिए अभी जल निगम ने कोई कार्य योजना तैयार नहीं की है। इस धनराशि में से नगरीय क्षेत्रों में ही हैंडपंप लग सकेंगे।
सभी ग्राम पंचायतें हो चुकी हैं संतृप्त
जिले में 885 ग्राम पंचायतें हैं। जल निगम की मानें तो सभी ग्राम पंचायतें हैंडपंपों से संतृप्त हो चुकी हैं। ग्राम पंचायतों में अब पाइप सप्लाई से पेयजल व्यवस्था लागू होगी। इसके लिए ओवर हेड टैंक ही बनाए जाएंगे।
इस वर्ष ग्रामीण क्षेत्र में हैंडपंपों को कोई बजट नहीं मिला है और न ही उम्मीद रह गई है। दरअसल, केंद्र सरकार ने अपनी पॉलिसी बदली है। केंद्र सरकार पहले ही इस बात का संकेत दे चुकी है कि ग्रामीण क्षेत्र में हैंडपंपों की अपेक्षा पाइप पेयजल योजना लागू हो। गांवों के लिए इस योजना में प्रस्ताव भी मांगे जा रहे हैं।
- आरके गुप्ता, एक्सईएन जल निगम