बदायूं। सिविल लाइंस इलाके में अफीम तस्करों से मोटा सौदा करने के आरोपी पुलिसकर्मियों की हाईकोर्ट से जमानत हो गई। हैरानी की बात ये है कि उनमें से एक सिपाही ने पुलिस लाइन में आमद करा ली है। जबकि निलंबित चौकी इंचार्ज आकाश कुमार और दूसरा सिपाही अंकुश कसाना आमद कराने की जुगत भिड़ा रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड में दोनों अभी फरार हैं। रिपोर्ट के बाद आम आदमी के वारंट और कुर्की करने वाली पुलिस ने अपने साथियों पर जो रहमदिली बरती है वह चर्चा का विषय बनी है।
ये मामला 16 मई 2020 की रात का है। उस समय एसआई आकाश कुमार शेखूपुर पुलिस चौकी के इंचार्ज थे। उन्होंने दो सिपाहियों अंकुश कसाना और निशांत मान के साथ आंवला बदायूं रोड पर सालारपुर गांव के नजदीक से तीन अफीम तस्करों को पकड़ा था। उनके पास से आधा किलो अफीम बरामद हुई थी। तीनों पुलिसकर्मी उन्हें शेखूपुर पुलिस चौकी ले गए। वहीं उन्हें कार्रवाई के नाम पर धमकाया गया। इससे तीनों तस्कर डर गए थे। उन्हें छुड़ाने के लिए रात में ही कई लोग पहुंचे। आखिर में 80 हजार रुपये लेकर पुलिसकर्मियों ने उन्हें छोड़ दिया। उनके पास से बरामद अफीम जब्त कर ली गई। जब दूसरे दिन इसकी चर्चा आम हुई तो अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस पर एसएसपी संकल्प शर्मा ने एसपी सिटी प्रवीन सिंह चौहान से मामले की जांच कराई। इसी दौरान तीनों पुलिस कर्मी अफीम समेत लापता हो गए। कुंवरगांव थाने में तस्करों को दोबारा पकड़कर पूछताछ कराई गई। तब पूरी हकीकत खुलकर सामने आई। इससे एसएसपी के आदेश पर सीओ सिटी चंद्रपाल सिंह ने एसआई आकाश कुमार, सिपाही निशांत मान और अंकुश कसाना के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई। एसएसपी ने उसी समय तीनों को निलंबित कर दिया था। तब से तीनों पुलिस कर्मी फरार थे।
कुछ दिन पहले ये खबर आई कि तीनों पुलिस कर्मी अपनी जमानत कराने के लिए हाईकोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। आखिरकार तीनों पुलिसकर्मी इसमें कामयाब हो गए। उन्होंने हाईकोर्ट से अपनी जमानत करा ली। इसमें सिपाही निशांत मान ने पुलिस लाइन पहुंचकर अपनी आमद करा ली है। जबकि निलंबित एसआई आकाश कुमार और सिपाही अंकुश कसाना कागजों में फरार चल रहे हैं।
दोबारा पकड़कर भी छोड़ दिए अफीम तस्कर
इस मामले में आश्चर्य की एक बात ये रही कि जिन अफीम तस्करों को शेखूपुर चौकी पुलिस ने पकड़कर छोड़ दिया था। वही तस्कर कुंवरगांव पुलिस ने दोबारा पकड़ लिए। तीन दिन तक लगातार उनसे पूछताछ हुई। उन्होंने ये भी कबूला कि वह अफीम सहित पकड़े गए थे फिर 80 हजार रुपये देकर छूटे थे। इसके बावजूद अभी तक उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। उन्हें जेल भी नहीं भेजा गया।
अफीम तलाशी तो और कसेगा फंदा
-तस्करों से बरामद जिस अफीम को लेकर इतना बड़ा मामला हो गया। 80 हजार रुपये में सौदा हो गया। वही अफीम अभी तक बरामद नहीं हुई है। पुलिस अधिकारी भी उसका पता लगाने में असफल साबित हो रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पुलिस अफीम तस्करों पर जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रही। उन्हें दोषी साबित करने का प्रयास किया तो पुलिसकर्मियों को बचाना मुश्किल हो जाएगा। तस्करी की बात खारिज होने और बरामदगी में अफीम न मिलने पर ही पुलिस अपने साथियों के बचाने का रास्ता बना सकती है।
हमारे पास सूचना आई है कि तीनों पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में अपनी जमानत करा ली है लेकिन अभी रिकॉर्ड के तौर पर कोई कागज नहीं आया है। सिपाही निशांत मान ने पुलिस लाइन में आमद कराई है। अभी एसआई आकाश कुमार और दूसरे सिपाही अंकुश कसाना का कुछ पता नहीं है।- संकल्प शर्मा, एसएसपी