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वादी ने पुलिस के नोटिस का जवाब कोर्ट को दिया

Fri, 19 Jun 2015 08:11 PM IST
badaun
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सूबे के कैबिनेट मंत्री आजम खां के खिलाफ देशद्रोह के मामले में वादी बजरंग दल नेता उज्ज्वल गुप्ता ने विवेचक पर परेशान करने का आरोप लगाया है। उज्ज्वल के वकील अरविंद परमान की ओर से सीजेएम कोर्ट में उस नोटिस का जवाब दाखिल कर दिया गया है, जो पुलिस ने 17 जून को वादी को दिया था। शनिवार को पुलिस को कोर्ट में आजम के खिलाफ चल रही पुर्नविवेचना की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करनी है। इस पर सीजेएम पुनीत कुमार गुप्ता मामले में सुनवाई करेंगे।
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आजम खां ने दिसंबर 2010 में जम्मू-कश्मीर पर विवादित बयान दिया था। उज्ज्वल गुप्ता ने उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कराया था। सूबे में सपा की सरकार बनने के बाद पुलिस ने मई 2012 में इस मामले में एफआर लगा दी। उज्ज्वल के प्रोटेस्ट पर कोर्ट ने दो साल पहले एफआर खारिज कर मामले में पुर्नविवेचना का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस ने पुर्नविवेचना पर कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं की।
सीजेएम कोर्ट ने 11 जून को एसएसपी को पत्र लिखकर पुर्नविवेचना पर रिपोर्ट तलब की। मामले में विवेचना कर रहे प्रभारी कोतवाल भोलू सिंह भाटी ने 17 जून को एक नोटिस उज्ज्वल गुप्ता को जारी कर आजम के बयान की रिकार्डिंग देने को कहा। शुक्रवार को उज्ज्वल के वकील की ओर से पुलिस के नोटिस का जवाब कोर्ट में दाखिल करके कहा गया है कि पुलिस वादी को रिकार्डिंग के नाम पर परेशान कर रही है। जबकि मामले में साक्ष्य जुटाना विवेचक का काम है। मामले में सुनवाई शनिवार को होगी।
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पुलिस बना रही केस वापस लेने का दबाव: उज्ज्वल
बदायूं। आजम खां के खिलाफ देशद्रोह के मामले में वादी बजरंग दल नेता उज्ज्वल गुप्ता ने आरोप लगाया है कि उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। पुलिस जानबूझकर उनको परेशान कर रही है। आजम के बयान से सवा सौ करोड़ देशवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं। आजम के बयान की मूल रिकार्डिंग पुलिस साढ़े चार साल में भी हासिल नहीं कर सकी। मामले में पहले के विवेचक आरके सक्सेना, वीरपाल सिंह और एमएम खान को भी रिकार्डिंग मुहैया कराई गई, लेकिन यह रिकार्डिंग इन लोगों ने गायब कर दी। आजम खां को बचाने में जुटी पुलिस से अब मेरा भरोसा उठ गया है। अगर कोर्ट कोई साक्ष्य मांगेगा तो उसको उपलब्ध कराया जाएगा।

कोर्ट ने जब एफआर खारिज की थी तब साफ कहा था कि अंतिम आख्या असत्य, अस्वभाविक और निराधार तथ्यों पर आधारित है। विवेचना अधिकारी का दायित्व था कि वह आजम खां की प्रेसवार्ता की मूल रिकार्डिंग इलेक्ट्रानिक मीडिया, टीवी चैनलों से हासिल करें। उन्होंने ऐसा नहीं किया। मात्र मूल रिकार्डिंग न होने के आधार पर अंतिम आख्या राजनीतिक कारणों से दाखिल की गई है। यह विवेचक की जिम्मेदारी थी कि वह मूल रिकार्डिंग हासिल करे, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। हम मामले में सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लडेंगे।-अरविंद परमार, वादी पक्ष के वकील
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