गाजियाबाद के पीयूष मालवीय ने पढ़ा कि ‘दिवाली पर किसी भूखे को रोटी
दे नहीं पाते, करोड़ों के मगर बेजा पटाखे फोड़ देते हैं।’ सुमित गुप्ता ने
कहा
चमन के दरम्यान है जो मिले सबको वो हरियाली, खुशी के दीप से जगमग हो
सबके घर में दिवाली।’ कवि षटवदन शंखधार ने पढ़ा, ‘दीप से दीप लोगों जलाते
रहो, हर अंधेरे को मन से मिटाते रहो।’ अभिषेक कमल ने पढ़ा, गुलाबों की अजब
खुशबू है वो हर एक बगिया में, नहीं दूजा कोई मां जैसा सानी दुनिया में।’ ये
कार्यक्रम एक्सीलेंट कोचिंग इंस्टीटयूट द्वारा आयोजित की गई।