पितृपक्ष अमावस्या पर रविवार दोपहर बाद तक गंगाघाट आस्था से सराबोर रहा।मंत्रोच्चार के बाद हवन-पूजन के दौरान पितरों से आशीर्वाद पाने को हवन-पूजन भी कराए गए।गंगा किनारे के आश्रमों में पुरोहितों और संतों को दक्षिणा भेंट की गई।
उझानी/कछला। पितृपक्ष अमावस्या पर रविवार दोपहर बाद तक गंगाघाट आस्था से सराबोर रहा। हजारों की संख्या में जुटे लोगों ने अपने पितरों की विदाई से पहले हवन-पूजन कराया। पुरोहितों ने मंत्रोच्चार कर उनके अपनों से विदाई की सभी धार्मिक रस्में पूरी कराईं।
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कछला गंगाघाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ, वह दोपहर तक चला। पितृपक्ष में अपने पितरों के अनुरूप धार्मिक क्रियाकलाप पूरे करने के बाद अंतिम दिन लोग जब गंगाघाट पर जुटे तो आसपास इलाका गंगा मइया के जयघोष से गूंज उठा। आस्था की डुबकी लगाने के बाद अधिकतर लोगों ने पुरोहितों से मंत्रोच्चार कराया। मंत्रोच्चार के बाद हवन-पूजन के दौरान पितरों से आशीर्वाद पाने को हवन-पूजन भी कराए गए।
जलदान के बाद पितरों की स्तुति की गई। पुरोहितों, संतों समेत आसपास के बुजुर्गों को भोजन कराया गया। गंगा किनारे के आश्रमों में पुरोहितों और संतों को दक्षिणा भेंट की गई। आचार्य प्रवीण शर्मा ने बताया कि अमावस्या पर उन सभी पितरों का श्राद्ध होता है, जिनकी तिथि के बारे में किसी को जानकारी नहीं हो। खासकर घाट पर पितरों की स्मृति में धार्मिक कार्यक्रम करने का विशेष फल अर्जित होता है। इससे पितर भी खुश होते हैं।