कथावाचक ने भक्ति के प्रकार भी बताए। कहा कि सच्चे मन से की जाने वाली पूजा कभी निष्फल नहीं जाती। भगवान का स्मरण करने से पहले मनुष्य का मन एकाग्र रखना चाहिए। मन विचलित होने पर अच्छे विचार नहीं आते। उन्होंने कृष्ण जन्म की कथा भी सुनाई। कहा कि कृष्ण का जन्म कारागार में हुआ। कंस के पापों का अंत करने के लिए उन्होंने अवतार लिया था। बाल रूप में भी कृष्ण ने मानव को कर्म करने की प्रेरणा देनी शुरू कर दी थी।
कथा के प्रति अलख जगाने के लिए महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। उन्होंने भी धर्म की रक्षा और कथा सुनने का आह्वान किया। कथा शुरू होने से पहले आयोजकों ने पूजन कराया। इस मौके पर पूर्व प्रधान रवेंद्र सक्सेना, देवेंद्र प्रजापति, रतनेश सक्सेना, नेत्रपाल साहू, भगवान दास, जसवीर यादव, राहुल मिश्रा, शंकर सिंह, मोनू चौहान, मदनपाल आदि मौजूद थे।