सरकारी में रिपोर्ट निगेटिव, प्राइवेट में डेंगू पॉजिटिव
गांव निवासी किशनवीर ने बताया कि उन्हें बहुत तेज ठंड लग कर बुखार आया था, पास में बक्सा रखा है। छोटे भाई से रजाई निकलवाई और एक के बाद करके, दो रजाई ओढ़ा दी। उनको सरकारी अस्पताल ले गए। वहां पर जांच कराई गई, तो डेंगू की रिपोर्ट निगेटिव आई, उसके बाद में प्राइवेट लैब में जांच कराई, तो वह पॉजिटिव आयी। मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल से डेंगू की दवाई ली है। सरकारी योजनाओं का और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं का गांव वालों को कोई बड़ा फायदा नहीं मिल रहा है।
ग्रामीणों को केवल पैरासिटामोल दवा देने का लगाया आरोप
गांव में स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिविर लगाए हैं। इसमें बुखार पीड़ित, डेंगू पीड़ित आदि को दवाएं दी जा रही है, ताकि वह जल्द सही हो सके। वहीं, शाहिद, वाजिद, साजिद, मोहम्मद उमर समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि टीम की ओर से केवल पैरासिटामोल की गोलियां दी जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि डेंगू, मलेरिया या सीजन बुखार है। सभी में केवल पैरासिटामोल टैबलेट दी जा रही है, जो इन बीमारियों के लिए नाकाफी है। यहीं वजह है कि ग्रामीण परेशान है।
श्योराज सिंह ने बताया कि गांव में डेंगू फैल चुका है। स्थिति अब कंट्रोल से बाहर है। स्वास्थ्य विभाग केवल खानापूर्ति में लगा हुआ है, जितना काम कागजों में कर अधिकारियों को भेजा जाता है। अगर उसका 50 प्रतिशत भी धरातल पर कर लें, तो काफी बेहतर होगा।
रणवीर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग केवल अपनी कागजी कार्रवाई पूरी करने में लगा है। गांव में कौन मर रहा है। उनको इससे कोई लेना-देना है। केवल उसकी पुष्टि डेंगू से न निकले। यह साबित करने में पूरी ताकत लगा रहे हैं।
एमओआईसी रोहित कुमार ने बताया कि गांव में लगातार शिविर लगाया जा रहा है। लोगों की जांच कर, उनकी बीमारी के अनुसार दवा का वितरण किया जा रहा है।