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Budaun News: सीटी स्कैन के लिए मेडिकल कॉलेज से जिला अस्पताल भेजे जा रहे मरीज

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राजकीय मेडिकल कॉलेज। संवाद
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बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। शासन की अनुमति के चार साल बाद भी यहां सीटी स्कैन मशीन नहीं लग सकी है। हर माह 200 से अधिक मरीज भटकने के लिए मजबूर हैं। गंभीर मरीजों को छह किलोमीटर दूर जिला अस्पताल में सीटी स्कैन कराने भेजा जाता है। मरीजों के साथ तीमारदारों को भी परेशान होना पड़ रहा है।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में कई सुविधाओं की कमी है। सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों का एमआरआई व सीटी स्कैन कराने की जरूरत पड़ती है। इसकी मशीनें मेडिकल कॉलेज में नहीं हैं। इससे मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है। 2021 में शासन ने मेडिकल कॉलेज में एमआरआई व सीटी स्कैन मशीन लगाने की अनुमति दी थी। तब कहा जा रहा था कि मेडिकल कॉलेज में एक महीने के अंदर एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा शुरू करा दी जाएगी। चार साल बीतने के बाद भी न तो एमआरआई शुरू हो सका न ही सीटी स्कैन की सुविधा ही मरीजों को मिल सकी।


टेंडर प्रक्रिया तक पूरी नहीं करा सका विभाग
राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन लगाने की जिम्मेदारी फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को दी गई थी। फिरोजाबाद कॉलेज के डॉक्टर अब तक मशीनों के लिए टेंडर की प्रक्रिया तक पूरी नहीं कर सके हैं। लापरवाही के पीछे एक वजह यह भी है कि बदायूं के मेडिकल कॉलेज की तरफ से भी दबाव नहीं बनाया जा रहा है।
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-तीमारदार बोले-

पांच सौ रुपये में की एंबुलेंस, तब मरीज को लाए जिला अस्पताल
सोरों (कासगंज) के रहने वाले राम सिंह ने बताया कि भतीजे का उझानी के पास एक्सीडेंट हो गया था। उसके सिर में गंभीर चोट आई है। दो दिन बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टर ने सीटी स्कैन कराने को कहा। पर्चा थमाकर कहा, जिला अस्पताल में सीटी स्कैन करा लाओ। जिला अस्पताल में लाने के लिए पांच सौ रुपये में एंबुलेंस की। आने-जाने और सीटी स्कैन कराने में करीब छह घंटे खराब हुए।



सीटी कराने में पूरा दिन हुआ खराब
जरीफ नगर के रहने वाले विनोद कुमार ने बताया कि रिश्तेदार युवक बाइक से गिरकर घायल हो गया। उसको राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। डॉक्टर ने कहा- मरीज का या ताे सीटी स्कैन कराके लाओ नहीं तो अलीगढ़ ले जाओ। सीटी स्कैन कराने जाने से पहले वाहन की व्यवस्था करने में ही दो घंटे लग गए। एक रिश्तेदार की कार मंगाकर घायल को सीटी स्कैन कराने के लिए जिला अस्पताल लाए हैं। अब चार बजे सीटी स्कैन हो सका है। पूरा दिन ही खराब हो गया।

तीन माह बाद भी प्राचार्य हर बात से अंजान
मेडिकल कॉलेज का हाल यह है कि जब किसी बात के बारे में पूछो तो प्राचार्य का एक ही जवाब होता है कि वह अभी आए हैं। उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है, दिखवाते हैं, जबकि उन्हें चार्ज लिए हुए तीन महीने हो गए।

एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन लगाने की अनुमति 2021 में ही मिल गई थी। अब तक क्यों नहीं लग सकी, इसके बारे में नहीं बता सकते। प्रयास करेंगे कि जल्द ही मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन व एमआरआई की सुविधा मरीजों को मिलने लगे। - डॉ. अरुण कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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