बदायूं। शहर में प्रस्तावित 15 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्माण को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने आवश्यक पर्यावरणीय औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निष्पादन आवेदन का निस्तारण कर दिया। इससे लंबे समय से प्रस्तावित सीवरेज परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
शहर में शेखूपुर रोड पर बन रहे एसटीपी प्लांट का कुछ लोगाें ने विरोध किया था। मामला एनजीटी तक पहुंच गया। वाद दर्ज कर एनजीटी ने सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने अपनी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में कहा गया है कि निरीक्षण के समय निर्माण एजेंसी उत्तर प्रदेश जल निगम (अर्बन) ने कंसेंट टू एस्टैब्लिश (सीटीई) प्राप्त किए बिना निर्माण कार्य शुरू कर दिया था। इस पर बोर्ड ने निर्माण कार्य रुकवा दिया और आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति मिलने तक कार्य न करने के निर्देश दिए थे।
बाद में कार्यदायी संस्था ने नियमानुसार आवेदन कर आवश्यक अनुमति प्राप्त की। यूपीपीसीबी के अनुसार, आठ फरवरी को एसटीपी निर्माण के लिए कंसेंट टू एस्टैब्लिश जारी कर दिया गया। एजेंसी ने यह भी आश्वासन दिया था कि भविष्य में सभी वैधानिक पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने के बाद ही निर्माण और संचालन किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान आवेदक पक्ष ने भी बोर्ड की अनुपालन रिपोर्ट पर संतोष जताया। इसके बाद न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने माना कि मामले में किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है और आवेदन का निस्तारण कर दिया। एनजीटी के आदेश के बाद शहर की सीवरेज परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में प्रशासन और कार्यदायी संस्था को राहत मिली है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को लेकर एनजीटी की ओर से फैसला सुनाया गया है। इसमें एसटीपी के लिए हरी झंडी मिल गई है। अब काम तेजी से कराया जाएगा। -विनय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ