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सात दिन बाद पटरी पर आई समझौते की गाड़ी....हड़ताल खत्म

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बदायूं। हड़ताल और फिर उसे खत्म कराने के लिए अफसरों की मध्यस्थता, कार्रवाई की चेतावनी और पालिकाध्यक्ष द्वारा खुद सफाई करके न झुकने का संदेश देना। सारे प्रयास फीके साबित हुए। सातवें दिन हड़ताल टूटी तो राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य मनोज मसीह की मध्यस्थता से। बुधवार को बंद कमरे में मसीह की मौजूदगी में पालिकाध्यक्ष से हड़ताली कर्मचारियों की बात हुई तो समझौता हो गया और हड़ताल खत्म कर दी गई। अब बृहस्पतिवार से सारे सफाई कर्मचारी काम पर आ जाएंगे। इस बीच शहर में कूड़े के ढेरों ने लोगों का सड़कों से निकलना मुश्किल कर दिया था।
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अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के बैनर तले 27 जून के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे। उसी दिन से लगातार नगर पालिका परिषद कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन चल रहा था। इससे शहर में गंदगी के हालात होने पर 29 जून को सिटी मजिस्ट्रेट वार्ता करने के लिए खुद पालिका दफ्तर पहुंचे, मगर कर्मचारी नेताओं की जिद से बात नहीं बन पाई। इसके बाद एक जुलाई को पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल खुद शहर में सफाई के लिए निकलीं, ताकि संदेश दिया जा सके कि इन हड़ताली कर्मचारियों के आगे वह झुकेंगी नहीं। अगले दिन सीडीओ ने भी प्रयास किए, मगर तब कर्मचारी नेता सामने नहीं आए और बात नहीं बन सकी। अब लगने लगा था कि मामला कहीं लंबा न खिंच जाए, क्योंकि ईओ की ओर से रिपोर्ट लिखाने के लिए तहरीर पुलिस को दे दी गई थी। पुलिस अधिकारी भी मामले को समझ रहे थे, इसलिए एफआईआर लिखने से बच रहे थे। कुल मिलाकर नतीजा नहीं निकल पा रहा था।
अब मामला बना तो अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य मनोज मसीह की मध्यस्थता से। नगर पालिका में उनकी गहरी पकड़ है और भाजपाई होने के कारण पालिकाध्यक्ष से तो अच्छे संबंध हैं ही, कर्मचारी नेताओं से भी हैं। दोनों ही पक्ष ने उनसे संपर्क किया। पालिकाध्यक्ष की ओर से भी उनसे मध्यस्थता को कहा गया तो कर्मचारी नेताओं की तरफ से भी। कर्मचारी नेता इसलिए बैक चैनल से बात कर रहे थे कि कहीं पुलिस के झंझट में न पड़ जाएं। यह कोशिशें बृहस्पतिवार शाम को परवान चढ़ गईं। इन बीच के दिनों में यह काम इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि मसीह दो-तीन दिन से शहर से बाहर थे।
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नगर पालिका दफ्तर में बंद कमरे में जब वार्ता हुई तो मसीह, पालिकाध्यक्ष और कर्मचारी नेता कुक्कू और अनिल प्रकाश के अलावा दो-तीन पालिका सदस्य थे। एक एक करके सभी मांगों पर बात हुई और कई पर बीच का रास्ता निकालते हुए समझौता कर लिया गया। इसके बाद हड़ताल समाप्ति की घोषणा कर दी गई।
ये मांगें मानीं गईं
कर्मचारियों का सातवां देय वेतनमान एरियर छह हजार रूपये प्रति व्यक्ति चार जुलाई को दिया जाएगा। साथ ही दैनिक वेतन भोगी सफाई कर्मचारियों को छह हजार रुपये अग्रिम रूप से भुगतान किया जाएगा, लेकिन इसका समायोजन उनके जून माह के वेतन से कटौती करके होगा। हड़ताल अवधि के दौरान का किसी भी कर्मचारी का वेतन नहीं काटा जाएगा। जिन पदाधिकारियों के विरुद्घ एफआईआर के लिए तहरीर दी गई है, उसे वापस लिया जाएगा। दैनिक वेतन भोगी सफाई कर्मचारियों के समायोजन के संबंध में शासन के निर्देशों के अनुसार काम होगा। आउट सोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन मामले में शासनादेश के अनुसार भुगतान की कार्रवाई की जाएगी।
सफाई कर्मचारियों को वार्ता के लिए बुलाया गया। जब वह आए तो उसके बाद वार्ता हुई। इसमें सात बिंदुओं पर वार्ता हुई, जिससे सभी सफाई कर्मचारी सहमत थे। उसके बाद में धरना खत्म कर दिया गया। गुरुवार से शहर में सफाई अभियान चलेगा।
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-दीपमाला गोयल, पालिकाध्यक्ष
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