पौराणिक कथा से जुड़ी मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार कामदेव ने पलाश वृक्ष पर बैठकर भगवान शिव की तपस्या भंग की थी। शिव के क्रोध से कामदेव भस्म हुए और वृक्ष दहक उठे। तभी से इसके फूल शिव के तीसरे नेत्र की ज्वाला जैसे माने जाते हैं। प्रकृति प्रेमियों को चिंता है कि यदि संरक्षण के ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में पलाश वन इतिहास बनकर रह जाएंगे।
सूखे फूलों से बनाया जा रहा रंग, 20 मार्च के बाद टेशू के खिलेंगे फूल
स्थानीय निवासी कृपाल ने बताया कि इस साल होली का त्योहार पहले पड़ रहा है। इसी के चलते टेशू के फूल नहीं खिले हैं। बताया कि करीब 20 मार्च के बाद इन पेड़ों में फूल आते है। स्थानीय मंदिर के पुजारी महेश दास ने बताया कि होली समय से पहले है इसलिए जंगल में फूल नहीं खिले हैं। बताया कि सूखे फूल रखे हैं उसी से रंग बनाकर होली पर खेला जाएगा। जबकि यदि फूल खिले होते तो गीले रंग से होली खेली जाती।