शुरुआती दौर में धान खरीद की दुर्दशा को अंतिम दिनों में सुधार लिया गया। इसकी वजह बनी कमीशन। कमीशन पर धान खरीद शुरू होते ही इजाफा हुआ और धान खरीद का लक्ष्य भी भेद दिया गया। खरीद का लक्ष्य 53,520 मीट्रिक टन रखा गया था लेकिन आखिर तक ऐसा नहीं लग रहा था कि धान खरीद का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। आखिरी दिनों में धान खरीद लक्ष्य तक को पार कर गई।
धान खरीद में लक्ष्य दूर होने पर मंडल के नोडल अधिकारी/अपर आयुक्त खाद्य श्यामसुंदर शर्मा ने पिछले दिनों धान खरीद में लापरवाह संस्थाओं के प्रमुखों की डाट-फटकार भी लगाई लेकिन धान खरीद में कोई इजाफा नहीं हुआ। जबतक सीधी खरीद हुई तो स्थिति भी डांवाडोल रही। कमीशन पर खरीद शुरू कराते ही लक्ष्य भी जल्दी ही हाथ आ गया। जनवरी के अंत तक खरीद निर्धारित थी। सीधे खरीद में 32,303 और कमीशन में 51,111 एमटी खरीद हो गई। इस प्रकार खरीद 83,414 एमटी खरीद पहुंच गई। जो लक्ष्य 53,520 एमटी से काफी आगे है। -----
धान खरीद का लक्ष्य चार गुना से अधिक
जिले में पहले 11000 एमटी धान खरीद का लक्ष्य था। यह लक्ष्य खरीद करने वाली संस्थाएं पूरा नहीं कर सकीं थीं। इसबार धान खरीद का लक्ष्य 53,520 एमटी रखा गया है।
विपणन विभाग सक्रिय, बाकी निष्क्रिय
सात विभागों को धान खरीद का बदायूं में जिम्मा दिया गया था। इसमें विपणन विभाग ने सबसे अधिक धान की खरीद की। विपणन विभाग के छह, कर्मचारी कल्याण निगम के दो, यूपी एसएस के तीन, एग्रो के चार, पीसी एफ के 10, एफसीआई के दो, एसएफआई के दो खरीद केंद्र हैं। डिप्टी आरएमओ का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप कमीशन पर खरीद शुरू हो जाने के बाद से खरीद में तेजी आ गई और लक्ष्य भी मिल गया।