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बाढ़ आई तो गंगा से ज्यादा   रामगंगा होगी खतरनाक 

Wed, 22 Jun 2016 12:12 AM IST
बदायूं, ब्यूरो
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दो खास खतरे के प्वाइंटों को बना दिया गया मजबूत
नई तकनीक से मरम्मत, बाढ़ खंड को सुरक्षा का भरोसा 
 जून से ही गंगा और रामगंगा में बाढ़ के खतरे को भांपना शुरू कर दिया जाता है। इस बार भी आधे जून के बाद से गंगा और रामगंगा की निगरानी शुरू कर दी गई है। गंगा के सभी बांध बाढ़ खंड ने दुरुस्त कर दिए हैं, वहीं रामगंगा पर बांध न होने के कारण यहां बाढ़ का खतरा कम नहीं है। बाढ़ के दिनों में गंगा से अधिक रामगंगा सबसे बड़ा खतरा साबित होती है। इसकी वजह है कि यहां गंगा की तरह बांध नहीं बने हैं। गंगा में बाढ़ आई तो बांधों में ही सिमट कर रह जाएगी। 
गंगा नदी जिले की दक्षिणी सीमा को छूते हुए निगल रही है तो रामगंगा पूर्वी दिशा में सीमा पर है। गंगा की बाढ़ से सुरक्षा को 79.90 किमी बांधों से घेर दिया गया है। केवल कादरचौक क्षेत्र छूटा था जो बाद में करीब 10 किमी बांध बना दिया गया था, जिससे गंगा की धार को रोका जा सके। बाढ़ नियंत्रण को एक करोड़ रुपये मिले थे। इससे बाढ़ खंड विभाग ने बांधों की मरम्मत करवा दी है। 
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खतरा टालने वाली दो परियोजनाएं हुईं पूरी
बदायूं। गंगा और रामगंगा से खतरा टालने वाली दो परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। रामगंगा से नवादा मधुकर गांव को बचाने के लिए और उसहैत बांध कटने से बचाने के लिए गत वर्ष काम शुरू हुआ था। करीब 14 करोड़ की यह परियोजना गत वर्ष पानी अधिक आ जाने के कारण अधर में लटक गईं थीं। इन दोनों परियोजनाओं को बाढ़ आने से पहले ही पूरा कर लिया गया है। -----
अनुरक्षण को प्रयोग हुए जीओ ट्यूब
बदायूं। बांधों के अनुरक्षण को सफल माने जाने वाले जीओ ट्यूब का भी बांधों की सुरक्षा में प्रयोग हुआ है। 60 फुट लंबे और तीन मीटर चौड़े इन ट्यूब में बालू भरकर ऐसे जगह मशीन से लगाए जाते है जहां बांधों के रिसाव की संभावना होती है। एक बार ट्यूब रख जाने के बाद दोबारा वहां से हटाना भी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा बांधों की सुरक्षा के कार्यों में रैन कटिंग और दर्रों को भी ठीक किया गया है। 
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छह लाख क्यूसेक पानी झेलने की क्षमता है बांधों की 
बदायूं। गंगा पर बने बांधों की क्षमता छह लाख क्यूसेक तक हो गई है। इससे पूर्व अगर चार लाख क्यूसेक पानी आ जाता था तो बांधों को खतरा हो जाता था और कोई न कोई बांध टूट जाता था। वर्ष 2010 में छह लाख क्यूसेेक पानी आ जाने के बाद बांध सुरक्षित रहे। अब देखना है कि बांधों की मरम्मत कहां तक सफल होगी। फिलहाल बाढ़ खंड का दावा है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हो चुके हैं। 
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बाढ़ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हो चुके हैं। अभी से नदियों के जल स्तर पर नजर रखी जा रही है। जून में मानसून आ जाने के बाद से नगिरानी और तेज हो जाती है। फिलहाल बांधों की सुरक्षा के प्रति महकमा भरोसे में है। 
- अरविंद कुमार वर्मा, एक्सईएन बाढ़ खंड
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