बदायूं। विकास भवन समेत अन्य विभागों में तैनात अधिकतर बाबुओं की तानाशाही चलती है। वह बिना सुविधा शुल्क के कोई भी काम करने के लिए तैयार नहीं होते हैं। अगर हो भी जाते हैं तो कागजों में इतनी कमियां निकाल देते हैं कि उनको पूरा करने में काफी समय लग जाता है। हालात यह है कि अपना ही जीपीएफ पाने के लिए कर्मचारी को अपने ही विभाग से अनुमति नहीं मिली। ऐसे में मजबूरी में आकर कर्मचारी ने आत्महत्या करने की चेतावनी दे डाली। जब इसकी जानकारी अधिकारियों को मिली तो उन्होंने तुरंत उसकी फाइल मंगाकर स्वीकृति दे दी। उम्मीद है कि सोमवार को कर्मचारी के लिए जीपीएफ की धनराशि मिल जाएगी।
ब्लॉक अंबियापुर में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी प्रमोद कुमार सक्सेना को बच्चों की बीएड की फीस जमा करनी है। इसके लिए उसे पैसे की जरूरत है। ऐसे में उन्होंने कई बार विभाग में अपने जीपीएफ से दो लाख रुपये एडंवास निकालने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन विभाग में कोई सुनने के लिए तैयार नहीं था। ऐसे में उनके बच्चों की पढ़ाई का एक साल खराब हो जाना था। इस कारण वह बहुत मानसिक परेशानी से गुजर रहे थे। इससे तंग आकर उन्होंने डीएम को पत्र भेजकर विकास भवन में आत्महत्या की धमकी दे दी थी। जानकारी होने पर डीपीआरओ ने शनिवार को ग्राम पंचायत अधिकारी के जीपीएफ की फाइल को संबंधित बाबू से तलब करने के बाद स्वीकृति दे दी। उम्मीद है कि उसका सोमवार को भुगतान हो जाएगा।
जीपीएफ का मामला पता चला था कि ग्राम पंचायत अधिकारी को यह नहीं मिला है। उनकी फाइल दिखवाई तो पता चला कि कर्मचारी अन्य कामों में व्यस्त थे, जिस वजह से फाइल पूरी नहीं हो सकी थी। मामला जानकारी में आते ही इसे तुरंत करा दिया।
-डॉ. शरनजीत कौर, डीपीआरओ