महिला से शव से आंखें निकालने का मामला, दोनों चिकित्सकों को भी इसी आधार पर मिली जमानत
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। महिला के शव से आंखें निकालने के मामले में मानव अंग प्रत्यारोपण की धारा हटने के कारण ही दोनों चिकित्सकों को जमानत मिली, ऐसे में इस धारा के हटने का फायदा अन्य आरोप भी उठा सकते हैं।
विदित हो कि 10 दिसंबर को मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव रसूला निवासी पूजा पत्नी जोगेंद्र ने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। इसके अगले दिन पूजा के शव का पोस्टमार्टम कराया गया था। इस दौरान महिला के शव से आंखें गायब हो थीं। इस पर डीएम मनोज कुमार ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की।
बाद में राजकीय मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों का बोर्ड भी गठित किया गया। इस दौरान थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. मोहम्मद उवैस और डॉ. मोहम्मद आरिफ हुसैन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने अपनी जांच रिपोर्ट पेश की। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने में मानव अंग प्रत्यारोपण की धारा हटा दी। इस आधार पर ही दोनों डॉक्टरों को जमानत मिल गई। ऐसे में अब इस मामले में शामिल अन्य आरोपी कर्मचारी भी फायदा उठा सकते हैं।
महानिदेशक ने मुख्य सचिव को सौंपी रिपोर्ट
महिला के शव से आंखें निकालने के मामले में पीएमएचएस के अध्यक्ष डॉ. सचिन वैश्य ने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं को एक पत्र लिखा था। उनके पत्र के आधार पर फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. जी खान से मामले की जांच कराई गई थी। डॉ. जी खान ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया था कि दूसरे पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह मामला सर्जिकल प्रत्यारोपण का मामला नहीं था। यानि यह मामला मानव अंग प्रत्यारोपण का नहीं है। महिला की आंखें किसी छोटे जानवर ने नोंची हैं। उनकी जांच रिपोर्ट को महानिदेशक दीपा त्यागी ने मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को भेजा है।
अब मजिस्ट्रेटी जांच का इंतजार
इस प्रकरण में अब मजिस्ट्रेटी जांच का इंतजार है। एडीएम प्रशासन विजय कुमार की अध्यक्षता में टीम बनी है। जिसमें सीओ सिटी आलोक मिश्रा और नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. केपी यादव शामिल हैं। टीम अभी जांच कर रही है। टीम ने कई बिंदुओं पर जांच की है। सूत्रों की माने तो मजिस्ट्रेटी जांच पूरी होने के बाद ही पोस्टमार्टम हाउस में लापरवाही बरतने वालों कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।