एक बार फिर बजट की बारीकियों और उसकी खामियों को उजागर किए बिना केंद्र सरकार के बजट को विपक्षी दलों ने खारिज कर दिया। मोदी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा गया कि जो बोलते हैं वह करते नहीं। इसलिए बजट की सुविधाओं में किसी प्रकार का दम नहीं है। कर्मचारी नेताओं ने बजट में युवा, किसान और मझोले व्यापारियों को दी जाने वाली सुविधाओं की तारीफ की, लेकिन किए गए वायदे को बजट में स्थान नहीं देना कर्मचारी हितों पर कुठाराघात है। इस संबंध में राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी बात कुछ इस प्रकार रखी। -----
लूट का पुलिंदा है मोदी सरकार का आम बजट
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह यादव ने कहा है कि मोदी सरकार का बजट जन विरोधी और लूट का पुलिंदा है। इससे आम आदमी को कोई फायदा नहीं होगा। केंद्र सरकार का बजट बेमतलब का हो गया है।
बुनियादी परिवर्तन लायक नहीं बना बजट
बसपा के जिलाध्यक्ष डॉ. क्रांति कुमार ने कहा कि देश के इतिहास में अबतक जितने भी बजट पेश किए गए हैं। कोई भी बजट बुनियादी परिवर्तन वाला नहीं पेश हुआ। दबे-कुचले लोगों को बजट में कोई जगह नही मिली है।
कोई दावे सच नहीं हो पाएंगे
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ओमकार सिंह का कहना है कि केंद्र में झूठी सरकार आई है। गरीबों और किसानों को लुहावने सपने दिखाए गए हैं। अबतक जिस प्रकार चुनाव से पूर्व पीएम मोदी समेत भाजपा ने झूठ का सहारा लिया है, वहीं यह बजट भी झूठ का पुलिंदा निकलेगा।
बजट अच्छा, कर्मचारी हित में कदम पीछे
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय प्रतिनिधि माधव मिश्र का कहना है कि बजट में गरीब, किसान, महिला और युवाओं के लिए अच्छा बजट है। परंतु राज्य कर्मचारियों के अनुरूप बजट में कुछ खास नहीं किया गया है। पांच लाख तक वेतन में केवल तीन हजार इनकम टैक्स की छूट दी गई है, जबकि पांच लाख तक पुरी छूट दी जानी चाहिए थी।
बजट पर विपक्षी कुछ कहने लायक नहीं रह गए
भाजपा जिलाध्यक्ष हरीश शाक्य ने कहा है कि विपक्षियों को तो विरोध करना आता है। नेताओं से मतलब नहीं, जनता तो खुश है। गरीबों को गैस कनेक्शन, किसानों को फसल बीमा और अन्य सुविधाएं, मझौले व्यापारियों को टैक्स छूट हर वर्ग को खुश करने वाला बजट है। पहली बार गरीबों का बजट पेश हुआ है। विपक्षी कुछ कहने लायक नहीं रह गए हैं।