बदायूं। लाइसेंस मिलने के बाद भी जिले में ब्लड सेपरेशन यूनिट का संचालन नहीं हो पा रहा है। विभाग उद्घाटन के फेर में संचालन को लटकाए हुए है। ब्लड सेपरेशन यूनिट का भवन बनकर तैयार है, मशीनें लग चुकी हैं। बावजूद इसके मरीजों के हितों से ज्यादा उद्घाटन के लिए वीआईपी आने की तलाश पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, एक बार फिर अब 26 जनवरी को उद्धाटन का आश्वासन दिया गया है।
जिला अस्पताल के ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट को लाइसेंस की दरकार थी, जो एक महीने पहले मिल गई। अगर, यूनिट का संचालन हो जाए तो मरीजों को आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स के लिए अन्य जनपदों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
जिला अस्पताल में 2021 में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट (बीसीएसयू) बनाने का काम शुरू हुआ था। इसके लिए 50 लाख रुपये की लागत से भवन निर्माण कराया गया व मशीनें लगवाई गईं। यहां तक कि संचालन से पहले ही स्टाफ को भी प्रशिक्षित कर तैयार कर लिया गया। इसके बाद लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया।
करीब एक साल तक मामला शासन में अटका रहा। दिसंबर की शुरुआत में शासन से लाइसेंस मिल गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग 15 दिन में संचालन करने का दावा कर रहा था। इसके तहत दिसंबर के आखिरी सप्ताह या फिर जनवरी के पहले सप्ताह में इसे शुरू करने का दावा किया गया। अब जनवरी भी जाने को है, लेकिन अभी तक ब्लड सेपरेशन यूनिट का संचालन शुरू नहीं हो सका है। अंदरखाने बताया जा रहा है कि मशीनों के कनेक्शन नहीं हो सके हैं। इसके साथ ही ब्लड सेपरेशन यूनिट के उद्घाटन के लिए वीआईपी की तलाश जारी है। इसी फेर में यूनिट का संचालन नहीं हो रहा है।
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वायरिंग हो चुकी है खराब
मशीनों को लगे काफी समय हो गया है। ऐसे में मशीनों के ठीक स्थिति में न होने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि, विभाग बिजली की वायरिंग खराब होने की बात कह रहा है। जिसको ठीक भी कराया जा रहा है। यह हाल तब है जब मशीनों को लगाते समय वायरिंग कराई गई थी लेकिन संचालन न होने के कारण मशीन व वायरिंग की स्थिति खराब हो गई।
प्लाज्मा के लिए भटक रहे मरीज
बुधवार को चकोलर के रहने वाले रामकिशोर प्लाज्मा के लिए भटकते रहे। उसने बताया कि पत्नी को खून की कमी होने पर भर्ती कराया है। डॉक्टर प्लाज्मा और प्लेटलेट्स चढ़ाने को कह रहे हैं। पत्नी की प्लेटलेट्स बहुत कम हो गई हैं। जिला अस्पताल आए तब बताया गया कि अभी यहां यूनिट शुरू नहीं हो सकी है। इसी तरह से हर रोज एक दाे मरीजों के तीमारदार भटकने को मजबूर हो रहे हैं। मजबूरी में प्राइवेट ब्लड बैंकों से महंगे दामों से खरीदना पड़ रहा है।
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यूनिट संचालित होने पर यह मिल सकेगा लाभ
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 450 यूनिट ब्लड रखने की है। औसतन प्रतिदिन 10 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। अब तक यहां ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट न होने के कारण एक यूनिट ब्लड एक मरीज के ही काम आता है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में ब्लड की एक यूनिट को चार अलग-अलग पार्ट में बांटा जा सकेगा। इसके बाद जरूरतमंदों को ब्लड के जरूरी तत्व ही दिए जाएंगे। जिला अस्पताल में डेंगू, मलेरिया, आग से जलने, घायल आदि के पीड़ितों के मामले बड़ी संख्या में आते हैं। इनमें कई को प्लाज्मा व प्लेटलेट्स आदि चढ़ाने की जरूरत रहती है। ब्लड सेपरेशन यूनिट शुरू होने पर उन्हें अस्पताल में इसकी सुविधा मिल सकेगी।
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बिजली की वायरिंग को ठीक कराया जा रहा है। कोशिश है कि 26 जनवरी को यूनिट का संचालन कर दिया जाए। तैयारियां की जा रही हैं।
-डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल