बदायूं। स्वास्थ्य विभाग के 25 न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्थापित हैं। जहां सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बावजूद इसके जमीनी हकीकत यह है कि कई केंद्रों पर इन सुविधाओं का बेहद कम उपयोग हुआ है। अप्रैल से अक्तूबर तक के सात माह की अवधि में जिले के इन 25 न्यू पीएचसी पर कुल 2291 डिलीवरी दर्ज की गईं। इनमें से पांच पीएचसी ऐसी हैं, जहां सिर्फ 23 ही प्रसव हो सके हैं। जबकि, दो स्वास्थ्य केंद्रों का तो खाता भी नहीं खुल सका है।
जिले के ब्लॉक आसफपुर में स्थित पीएचसी मौकमपुर और मन्नूनगर में सात माह के दौरान एक भी डिलीवरी नहीं हुई। वजीरगंज ब्लॉक पीएचसी नौली हरनाथपुर, ब्लॉक बिसौली के भावीपुर में मात्र चार-चार डिलीवरी दर्ज की गईं। इसके अलावा ब्लॉक जगत के गिरधौल, ब्लॉक बिसौली के करनपुर और ब्लॉक अंबियापुर की सतेती पीएचसी पर सिर्फ पांच-पांच प्रसव हुए। इस तरह सात पीएचसी मिलाकर सात माह में केवल 23 डिलीवरी ही हो सकीं।
वहीं, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कुछ केंद्रों पर कम डिलीवरी होने के पीछे जागरूकता का अभाव और ग्रामीण महिलाओं का बड़े अस्पतालों की ओर रुझान जैसे कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
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उघैती की बात करें तो यहां पर सबसे ज्यादा 779 प्रसव हुए
ब्लाॅक सहसवान की उघैती की बात करें तो यहां पर सबसे ज्यादा 779 प्रसव हुए हैं। वहीं दूसरे नंबर पर ब्लॉक इस्लामनगर के रुदायन पर 561 और ब्लॉक सहसवान के खितौरा में 555 प्रसव हुए हैं।। इसके अलावा किसी भी पीएचसी पर यह आंकड़ा 50 भी पार नहीं कर पाया है।
बाकी सेंटरों का ये है हाल
-शहबाजपुर सहसवान में 46, खंडावा में 37, बेहटा गुसाई में 35, रिसौली में 31, दबतोरी में 29, शहजादनगर खेड़ा में 28, हर्रेनगला में 27, बरामयखेड़ा में 25, सादुल्लागंज में 24, गंधहा में 23, गूरा बरेला में 18, गुलड़िया में 17, भूड़ा भदरौल में 12, बादुल्लागंज में 11 और रसूलपुर कला में 10 ही प्रसव सात माह में हुए।
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वर्जन
-जिन केंद्रों पर कम प्रसव हुए है। वहां से रिपोर्ट मंगाई जाएगी। सभी को निर्देश दिए हैं कि वह अपने यहां पर ज्यादा से ज्यादा प्रसव कराएं।
-डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ बदायूं