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एक यूनिट ब्लड एचआईवी पॉजिटिव निकला

Tue, 04 Oct 2016 11:51 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
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पांच यूनिट ब्लड हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित पाया गया
डीआई की मौजूदगी में संक्रमित ब्लड को किया नष्ट 
 जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदाताओं के ब्लड की जांच हुई तो एक यूनिट ब्लड एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है। इसके साथ ही पांच यूनिट ब्लड हेपेटाइटिस-सी के संक्रमण का निकला। जिसे विधिक प्रक्रिया के बाद औषधि निरीक्षक पवन कुमार की मौजूदगी में नष्ट कर दिया गया। 
जिला अस्पताल के सरकारी ब्लड बैंक में रक्तदान करने वालों के रक्त की कई प्रकार से जांच होती हैं। सभी जांचों पर रक्त खरा उतरता है, उसे सुरक्षित रख लिया जाता है। बाद में यह ब्लड जरूरतमंदों को मुहैया कराया जाता है। जांच में संक्रमित पाए जाने वाले ब्लड को एक प्रक्रिया के तहत नष्ट कर दिया जाता है। जिले में एचआईवी का एक ताजा मामला ब्लड बैंक से पकड़ में आया है। पिछले दिनों एक समूह में रक्तदान करने वाले एक व्यक्ति के रक्त की जांच की गई, तो पता चला कि वह एचआईवी की गिरफ्त में है। ब्लड बैंक स्टाफ ने उस रक्तदाता को बुलाकर इस बारे में बता दिया। 
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रक्त की जांच में पांच यूनिट ब्लड हेपेटाइटिस-सी से भी ग्रस्त पाया गया। इन रक्तदाताओं को भी इस बारे में बता दिया गया है। संक्रमित रक्त के बारे में औषधि निरीक्षक पवन कुमार को बताया गया। बाद में एक प्रक्रिया के तहत रक्त नष्ट कर दिया गया। बाकी के रक्त को स्टॉक कर लिया गया है। 
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2013 में भी मिला था एचआईवी ग्रस्त रक्त
बदायूं। यह पहला मामला नहीं है जब किसी को रक्तदान के बाद पता लगा हो कि वह एचआईवी की गिरफ्त में आ चुका है। 2013 में भी एक यूनिट ब्लड एचआईवी ग्रस्त पाया गया था। बाद में रक्तदाता को इस बारे में ब्लड बैंक प्रशासन ने अवगत करा दिया था। उस रक्तदाता का इलाज चल रहा है। 
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एंटीरिट्रो वायरल थिरेपी की जरूरत
बदायूं। विशेषज्ञ डॉ. आरसी दीक्षित की मानें तो एचआईवी का इलाज तो नहीं है, लेकिन एचआईवी की जद में आने वाले व्यक्ति एंटीरिट्रो वायरल थिरेपी के जरिए आसानी से अपनी पूरी जिंदगी जी सकता है। जिला अस्पताल में काउंसलिंग सेंटर से उसे संपर्क करना होता है। इसके बाद उसे बरेली जिला अस्पताल में स्थित एआरटी सेंटर में उसका इलाज चलता है। वहां से एक माह की दवा दी जाती है। सभी दवाइयां और काउंसलिंग नि:शुल्क होती है। अगर समय पर दवाइयों का इस्तेमाल किया जाए तो कोई समस्या नहीं है। रोगी आसानी से ताउम्र जी सकता है। इस संक्रमित व्यक्ति को भी इस बारे में बता दिया गया है।
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संक्रमित रक्त को एक प्रक्रिया के तहत नष्ट कर दिया जाता है। ऐसे रक्त को गहरा गड्ढा खोदकर उसमें दवा दिया जाता है। जिला अस्पताल में मिले संक्रमित रक्त को भी नष्ट कर दिया गया है।
-पवन कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर
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