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कामधेनु एवं कल्पवृक्ष है मनुष्य जीवन

Mon, 21 Dec 2015 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
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शांतिकुंज से आए कथा शिरोमणि सुनील शर्मा ने कहा कि मनुष्य का जीवन ही प्रत्यक्ष देवता है। मानव शरीर में जो भी आत्मदेवता हैं, उसकी पूजा करने से विधाता की सभी शक्तियां प्राप्त होती हैं। कहा कि जीवन की पूजा संयम और स्वाध्याय से होती है। मनुष्य जीवन पारसमणि, कामधेनु, एवं कल्पवृक्ष है। इसके महत्व को समझने और दूसरों के काम आने वाला मानव देवता है। कहा त्याग एवं बलिदान से मां का मस्तक ऊंचा होता है और मनुष्य अपना जीवन सफल बना सकता है।
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शर्मा ने कहा कि भोग विलास में जीवन बिताकर मनुष्य ईश्वर से मिली ज्ञान की अमूल्य संपत्ति को नष्ट कर रहा है। ईश्वर से जो शक्तियां मनुष्य को मिलीं, वे किसी दूसरे को नहीं मिलीं। उनका सदुपयोग न होने से मनुष्य पतन की ओर जा रहा है। कहा कि अब मनुष्यों जितनी चालाकी, बेईमानी, भ्रष्टाचार, दुराचार पशुओं में भी नहीं। पशु-पक्षी प्रकृति के नियमों को मानकर हर परिस्थितियों में खुशहाल जीवन जी रहे हैं।
कथा संयोजक अनिल राठौर, बी ज्ञानेंद्र, महेशचंद्र सक्सेना, आरडी शर्मा ने शांतिकुंज हरिद्वार की टोली में शामिल बसंतलाल सोलंकी, प्रहलाद सिंह, अमर ज्योति, अनुज और महेश तिवारी को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया और भावभीनी विदाई दी। संचालन अनिल प्रकाश गुप्ता ने किया। इस मौके पर सुरेंद्रनाथ शर्मा, अमरवती, रामचंद्र प्रजापति, राजीव गौड़, सुभाष, कुमुद, शशि प्रजापति, शिवोहम, पंकज कुमार, नत्थूलाल शर्मा, विनीता गुप्ता, रामवीर सिंह, डीपी सिंह, जगदीश प्रसाद सारस्वत आदि मौजूद रहे।
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