बसपा का टिकट भाजपा छोड़ आए मेजर कैलाश पाने में रहे सफल
पार्टी कार्यकर्ताओं में विरोध की दरारें, खुलकर नहीं बोल पा रहे बसपाई
बसपा में कद्दावर नेता माने जाने वाले योगेंद्र सागर के बेटा कुशाग्र सागर का टिकट कट जाने और भाजपा से हाल ही में आकर शामिल हुए मेजर कैलाश के टिकट की घोषणा हो जाने के बाद बिसौली की राजनीति में भूचाल आ गया है। अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित इस सीट पर मुस्लिमों को लेकर राजनीति बेहद गर्मा गई है। सपा नेताओं ने मुस्लिम नेताओं से संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया है। उनका मानना है कि योगेंद्र सागर के पुत्र को टिकट न मिल पाने के कारण उनमें क्षोभ है। पिछले चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा के कंडीडेट के रूप में मेजर से दूरियां बनाई थीं जो अब बसपा में आने के बाद नजदीकियां लाने में संकोच कर रहे हैं।
बिसौली लगभग साढ़े तीन लाख मतदाताओं वाली विधानसभा है। जिले में अहम विधानसभा इसलिए बनी है कि यह आरक्षित क्षेणी की विधानसभा है। बिसौली गत चुनाव मेें ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो चुकी है। यहां बता दें कि गत चुनाव में योगेंद्र सागर को टिकट मिला लेकिन कुछ लोगों ने इसे कटवा दिया था। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो बाद में बसपा सुप्रीमो ने बदले हालात और मुस्लिम मतदाताओं का रुझान देख योगेंद्र सागर की पत्नी प्रीति सागर को उम्मीदवार बना दिया। सपा की लहर में वह हार गईं लेकिन मुस्लिमों के रुझान के कारण उन्होंने सपा को सीधी टक्कर दी। हालांकि पिछले चुनाव में सपा के आशुतोष मौर्य को विजय मिली।
अभी जिला पंचायत में आशुतोष मौर्य की परिवार की महिला प्रत्याशी को बेहटा गुसाईं सीट से हराकर जिला पंचायत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराके एक बार योगेंद्र सागर ने अपनी राजनीतिक पकड़ का अहसास करा दिया था। बावजूद इसके पार्टी में अपनी धमक बरकरार रखने के लिए योगेंद्र सागर के समर्थन में लगे जिला कार्यकारिणी के दो प्रमुख प्रत्याशियों को हटा दिया गया और यही नहीं बिसौली विधानसभा की पूरी बसपा कार्यकारिणी भंग कर दी गई। इससे साफ जाहिर हो गया कि पार्टी में योगेंद्र की धमक बनाने वालों को जानकर झटका दिया गया। योगेंद्र सागर के कद्दावर नेता अनना भी इसका सबब बना है। अब कमान पार्टी के चुनिंदा लोगों के हाथों में आ गई है। बदली परिस्थितियों में नसीमउद्दीन सिद्दीकी को आंकड़े दिखाकर और विश्वास में लेकर मेजर कैलाश को बसपा का प्रत्याशी घोषित कर दिया गया है।
इन्हीं सब कारणों को लेकर दूसरे नंबर की संख्या वाले मुस्लिम मतदाताओं पर खलबली है। यहीं वजह है कि कई बसपा के मुस्लिम नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया शुरू कर दी है। वहीं उनकी मनोदशा को देखते हुए सपा ने इस बड़ी संख्या वाले मतदाताओं पर अपनी मेहरवान नजर कर दी है। नाराज बसपाई खुलकर भले ही अभी मैदान में विरोध दर्ज नहीं करा पा रहे हैं लेकिन पार्टी की नीतियों के वजह से अपनी प्रतिक्रियाएं आम स्थलों पर देने से नहीं चूक रहे हैं।