मार्च में तीन बार कहर बनकर किसानों को तबाह करने वाला मौसम अप्रैल शुरू में भी पीछा नहीं छोड़ रहा है। कटाई के टाइम पर बारिश और ओलों ने खेत में कटे पड़े गेहूं के पूलों को भिगोकर गेहूं को दागी कर दिया, वहीं बालियों से गेहूं अलग कर उनको नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में किसान को अपने भाग्य कोसने के अलावा कुछ बचा नही हैं। शुक्रवार की शाम फिर काले बादल छाने से किसानों का दिल धड़कने लगा। उनको फिर बारिश की आशंका ने चिंता में डाल दिया है।
सरकार भले ही राहत देकर आंसू पोंछने का यत्न करे, लेकिन किसान की उतनी भरपाई नहीं हो सकेगी, जितना उसे नुकसान पहुंचा है। जिले के दक्षिणी सिरे कादरचौक इलाके से उठे काले बादलों ने गुरुवार रात पूरे जिले को ढक लिया। कहीं तेज तो कहीं हल्की बरसात हुई। पूरी रात रुक-रुककर बारिश हुई। सुबह के समय अलापुर और बदायूं के बीच ओलों की बौछार हो गई। किसानों को खेतों में गेहूं कटा पड़ा है। पिछले दो दिनों में मौसम खुला था, तो किसान ने जल्दी से गेहूं काटने शुरू कर दिए थे। तमाम किसानों का आलू भी खेत में खुदा पड़ा है। अन्य फसलों में मटर, सौंफ, सरसों आदि फसलें भी पकी खड़ी हैं। इन सभी को इस बारिश से नुकसान पहुंचा है।
कटी फसल में नुकसान का सर्वे कौन करे
जिले में 17 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फसलें 50 प्रतिशत से अधिक खराब हो चुकी हैं। किसानों को और राहत देने के लिए शासन ने अब 25 से 50 प्रतिशत तक खराब फसलों का भी सर्वे कराया है। यह तो खड़ी फसलों की तबाही का सर्वे है, लेकिन पिछली बरसात और ओलों ने किसानों की कटी पड़ी फ सलों को भी तबाह किया है। इसका तो कोई सर्वे भी नहीं हो रहा है। किसान को रबी की फसल ही सब कुछ होती है। यही फसल उसके हाथ से निकल रही है।
बारिश से रबी की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। शासन की मंशा के अनुरूप उन्हें राहत राशि भी दी जा रही है। व्यवस्थाओं के आधार पर अब 25 से 50 प्रतिशत के बीच नुकसान का भी आकलन कराया जा रहा है। किसानों को मुआवजा दिए जाने में पूरी पारदर्शिता रखी जाएगी। उनके प्रति शासन-प्रशासन की पूरी सहानुभूति है।
- आरपी यादव, आपदा प्रभारी/ एडीएम वित्त