परिषदीय स्कूलों में नया प्रवेश और आगामी कक्षाओं में जाने वाले बच्चे पुरानी किताबों से शिक्षा ग्रहण करेंगे। इसके लिए बच्चों से ही उनकी किताबें वापस लेने की तैयारी शुरू कर दी गई हैं। हालांकि जिला के शिक्षाविद् इसे गलत ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि जब व्यवस्थाएं नहीं तो क्यों बेहतरी का राग अलापा जाता है।
कांवेंट की तर्ज पर शिक्षा देने के उद्देश्य से नया शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू किया जा रहा है। इसमें महज तीन दिन बचे हैं। विभाग ने इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी है लेकिन नव प्रवेश पाने वाले बच्चे कैसे शिक्षा ग्रहण करेंगे इस पर अभी भी प्रश्नचिह्न है। विभागीय जानकारों की माने तो इस बार पुरानी किताबों से बच्चों को शिक्षा देने का निर्णय लिया है। इस पर पढ़कर निकलने वाले बच्चों से किताबें वापस लेने की तैयारी भी की जा रही है। करीब-करीब यह शुरू भी की जा चुकी है। वहीं शिक्षाविद् कहते हैं कि जो बच्चे स्कूल को छोड़कर घर बैठ गए हैं उनके किताबें लेना मुश्किल भरा है। दूसरी ओर जिन बच्चों की किताबें वापस ली जाएंगी उसमें कुछ ही सहीं होंगी बाकी खराब हो चुकी होंगे, शब्द अस्पष्ट हो चुके होंगे। वहीं पुराने सत्र की बची हुई कुछ किताबें भी देने की चर्चा है। हालांकि इनकी संख्या इतनी नहीं है। बीएसए कृपाशंकर वर्मा ने बताया कि सत्र की पहली बार शुरूआत एक अप्रैल से हो रही है। लिहाजा व्यवस्थाओं को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। सत्र स्टार्ट कराया जाएगा। किताबें वापस लेने की बात सामने आई है। इस पर भी अमल किया जाएगा।
नए सत्र को एक अप्रैल से शुरू करना सराहनीय है लेकिन व्यवस्थाएं अधूरी हैं। ऐसे में बच्चों से किताबें वापस लेना गलत है। बच्चों का किताबों से मोह होता है। वहीं गांव देहात का बच्चा किताबोें की ओर ज्यादा आकर्षित होता है। पूरे साल पढ़ने के बाद उन किताबों की स्थिति भी ज्यादा ठीक नहीं रह पाती है। ऐसे में नव प्रवेश पाए बच्चे उनसे कैसे पढ़ पाएंगे यह सोचने की बात है। - सतीश चंद्र मिश्रा, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ।