बदायूं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिलेभर में इज्जतघर बनाए गए, ताकि लोगों को खुले में शौच से मुक्ति मिल सके, लेकिन अनदेखी की वजह से इज्जतघर बदहाल होते गए। ज्यादातर शौचालयों में न शीट बची न ही दरवाजे। एक तरह से जनपद कागजों में ओडीएफ रह गया। इस कारण लोगों को खुले में शौच करने के लिए जाना पड़ रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में की गई पड़ताल में इज्जतघरों की स्थिति बेहद खराब मिली।
संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से मंगलवार को कई गांवों में पड़ताल कराई गई। इस दौरान किसी इज्ज्तघर में छत नहीं तो कई की सीटें टूटी और दरवाजे गायब मिले। दीवारें सीलन लगने के कारण खराब मिलीं। कहीं-कहीं एक बार टैंक भरने के बाद दोबारा सफाई न होने के कारण शौचालय बंद पड़े मिले।
इज्जतघरों के अलावा जिले में पंचायत स्तर पर ग्रामीणों के उपयोग के लिए बनाए सामुदायिक शौचालयों की भी स्थिति खराब मिली। खुले में शौच जाने की कुछ लोगों की पुरानी आदत भी इसकी एक वजह बताई गई है। इधर, अलापुर क्षेत्र के संजरपुर गांव में बने शौचालय की स्थिति बदहाल होने के बाद लोगों ने उपयोग करना बंद कर दिया। दातागंज, बिसौली और सहसवान क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में इज्जतघर खराब हालत में मिले।
अब तक बनाए गए 4.38 लाख इज्जतघर
- पंचायतीराज विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2014 से 2019 तक 358528 और 2019 से अब तक 79878 इज्जतघर जनपद में बनाए गए हैं। कुल 4,38,406 इज्जतघर बनवाए जा चुके हैं। इनके निर्माण के लिए विभाग 12 हजार रुपये दो किस्तों में देता है। वहीं, 1037 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं।
वझेड़ा नूतन में शौच के लिए जंगल में जा रही महिलाएं
फोटो 12 नंबर
ओरछी। इस्लामनगर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम वझेड़ा नूतन में बना सामुदायिक सुलभ शौचालय पूरी तरह बदहाल है। गेट और सीटें टूटी हुई हैं, पानी के लिए लगा सबमर्सिबल कई महीने से खराब है। पानी की टंकी छत की जगह एक साइड में शोपीस बनकर रह गई। बताया गया कि इस समस्या को लेकर प्रधान मुकेश यादव, सचिव सोनकेश यादव और बीडीओ से कई बार शिकायत की गई, लेकिन सबमर्सिबल ठीक नहीं किया गया। इसी गांव की आरती, शांति देवी आदि ने बताया कि मोहल्ले की कोई महिला शौचालय में नहीं गई। शौच के लिए सभी महिलाएं जंगलों की ओर जाती हैं। वहीं, सचिव सोनकेश यादव शौचालय ठीक होने का दावा कर रहे हैं। बीडीओ नितिन कुमार कहना है कि शिकायत मिलने पर जांच कराएंगे।
क्षतिग्रस्त होने पर उपयोग हुआ बंद
उझानी। क्षेत्र के अधिकतर गांवों में सरकारी योजना से शौचालय (इज्जतघर) बने थे। गांव कुड़ा नरसिंहपुर में स्थिति काफी खराब है। 90 फीसदी से अधिक घरों में अंदर या बाहर बने शौचालय उपयोग के लायक नहीं हैं। किसी के दरवाजे टूटे हैं तो किसी की शीट क्षतिग्रस्त होने पर उसे बंद कर दिया। ऐसे परिवार की महिलाओं को भी खुले में शौच को जाना पड़ता है। बीडीओ सर्वज्ञ अग्रवाल का कहना है कि पूरा ब्लॉक ओडीएफ घोषित है।
शौच के लिए बाहर जाते समय हुए ये हादसे
- चार अप्रैल 2025 की सुबह सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के गांव मझिया निवासी बाबूराम शौच करने के लिए बाहर जा रहे थे। अचानक उन पर सांड़ ने हमला कर दिया। उन्हें उठाकर जमीन पर पटक दिया, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
- उघैती क्षेत्र के सरह बरौलिया गांव निवासी वेद प्रकाश (60) खेती करते थे। 9 सितंबर 2024 को पांच बजे वह घर से शौच के लिए जा रहे थे। इसी दौरान सांड़ ने उन पर हमला कर दिया। पटक-पटककर सांड ने उनकी जान ले ली थी। संवाद
जिले में चार लाख से अधिक शौचालय बनवाए जा चुके हैं, जो परिवार बढ़ रहे हैं, या जिनके यहां शौचालय नहीं, उन्हें शौचालय दिए जा रहे हैं। सामुदायिक शौचालय की खराब स्थिति के बारे जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। -यावर अब्बास, जिला पंचायत राज अधिकारी बदायूं
कुड़ा नरसिंहपुर में बदहाल पड़ा शौचालय। सवांद- फोटो : Archive
कुड़ा नरसिंहपुर में बदहाल पड़ा शौचालय। सवांद- फोटो : Archive
कुड़ा नरसिंहपुर में बदहाल पड़ा शौचालय। सवांद- फोटो : Archive