एनआरएचएम घोटाले की जांच को पहुंची सीबीआई टीम ने स्वास्थ्य विभाग में दिन भर रिकार्ड खंगाले। दवा खरीद के काफी रिकार्ड गायब होने की संभावना है, क्योंकि वे मिले नहीं। टीम को और भी कई कागजात नहीं मिले, जिन्हें तीन दिन के भीतर मुहैया कराने को कहा गया है। सीबीआई सूत्रों ने दवा खरीद से लेकर एनआरएचएम के तहत हुईं नियुक्तियों तक धांधली की संभावना जताई है। प्रभारी सीएमओ डॉ. नरेंद्र कुमार का कहना है कि जो रिकार्ड नहीं मिले, उन्हें तलाशा जा रहे हैं।
नवंबर 2011 में अरबों रुपये का एनआरएचएम घोटाला सामने आया था। इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई। जांच में पता लगा कि बदायूं में भी घपले हुए हैं। पिछले दिनों सीबीआई ने बदायूं के सीएमओ को नोटिस जारी कर एनआरएचएम से जुड़े 2005 से 2011 तक के सभी रिकार्ड तलब किए थे। यह रिकार्ड स्वास्थ्य विभाग सीबीआई को नहीं भेज सका। मंगलवार को देहरादून सीबीआई कार्यालय से चार सदस्यों की एक टीम बदायूं पहुंची। सीएमओ दफ्तर में जांच एजेंसी ने घंटों रिकार्ड खंगाले। जांच एजेंसी को दवा खरीद के काफी रिकार्ड नहीं मिले हैं। सीबीआई टीम यहां से हरदोई रवाना हो गई। बताते हैं कि टीम हरदोई से सीतापुर और वहां से लखीमपुर भी जाएगी। इन जिलों में भी घोटाले हुए हैं। जांच टीम कुछ रिकार्ड अपने साथ ले गई है। सूत्रों की मानें तो जो रिकार्ड सामने आए हैं उनको देखकर माना जार हा है कि बदायूं में दवा खरीद से लेकर नियुक्तियों तक धांधली हुई है। सच क्या है यह सामने आने में सभी वक्त लगेगा।
सीएचसी-पीएचसी से मंगाए गए रिकार्ड
बदायूं। जिले की सभी सीएचसी पीएचसी से भी जेएसवाई समेत एनआरएचएम से जुड़े सभी रिकार्ड मुख्यालय मंगा लिए गए हैं। सीबीआई ने इनकी भी पड़ताल की। जांच एजेंसी ने सीएमओ को एक प्रारूप दिया है। इस प्रारूप के हिसाब से तीन दिन के भीतर सभी रिकार्ड सीबीआई के देहरादून कार्यालय भेजने को कहा गया है।
आयुष दवा खरीद में 30 लाख का घोटाला
बदायूं। स्वास्थ्य विभाग में एनआरएचएम के तहत आयुष अस्पतालों के लिए दवा खरीद में करीब 30 लाख रुपये का घोटाला हुआ है। दो साल पहले यह मामला सुर्खियों में आया था। जिला स्तर पर डीएम ने जांच कमेटी भी बनाई थी, लेकिन जांच लटक गई। स्वास्थ्य विभाग और एनआरएचएम के अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि फर्जी कमेटी बनाकर 30 लाख रुपये की दवा खरीद कर ली गई। यह दवा कहां गई, इसका कोई रिकार्ड स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है।
2005 से 2011 तक रहे अफसरों की जानकारी जुटाई
बदायूं। सीबीआई टीम ने वर्ष 2005 से 2011 तक बदायूं में रहे सभी सीएमओ और संबंधित कर्मचारियों के बारे में जानकारी भी जुटाई। इन सभी से जांच एजेंसी पूछताछ कर सकती है। इस अवधि में बदायूं में 10 सीएमओ की तैनाती रही। यह सभी अब सीबीआई के रडार पर हैं।