बदायूं। भारत सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर वीबी जीरामजी (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) कर दिया है। योजना को लागू करने से पहले जनपद के मनरेगा कार्ड धारक श्रमिकों की ई-केवाईसी की जा रही है। इसके लिए शासन की ओर से जनपद में एक्टिव कार्ड धारकों की 80 प्रतिशत ई-केवाईसी करने का लक्ष्य दिया गया है। अब तक 67 प्रतिशत कार्ड धारकों की ई-केवाईसी की जा चुकी है।
मनरेगा में पारदर्शिता बनी रही इसके लिए कार्डधारकों की ई-केवाईसी करने के लिए गांव-गांव अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके लिए गांव-गांव रोजगार सेवक मनरेगा कार्ड धारकों की फेस स्कैनिंग ओर फिंगर प्रिंट स्कैन कर ई-केवाईसी अपडेट कर रहे हैं। जनपद में लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 67 प्रतिशत श्रमिकों की ई-केवाईसी की जा चुकी है।
1.54 लाख श्रमिकों में करीब एक लाख श्रमिकों की ई-केवाईसी की जा चुकी है। बचे हुए लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है, ताकि शेष श्रमिकों की ई-केवाईसी पूरी की जा सके।
ई-केवाईसी न कराने वाले श्रमिकों नहीं मिलेगा काम
मनरेगा कार्ड धारकों की ई-केवाईसी की जा रही है। ई-केवाईसी न कराने वाले श्रमिकों को काम नहीं दिया जाएगा। इसके लिए डीसी मनरेगा अखिलेश चौबे की ओर से सभी रोजगार सेवकों को निर्देश दे दिए गए हैं। ई-केवाईसी कराने के बाद श्रमिक का मौके पर ही फेस डिटेक्शन कर हाजिरी लगाई जाएगी। इसके बाद श्रमिकों की हाजिरी ऑनलाइन ही सेव होती रहेगी। इसके बाद 7 या 14 दिन के मस्टरोल पर श्रमिकों के फेस डिटेक्शन कर उनके कार्य दिवसों का भुगतान किया जाएगा।
ई- केवाईसी से पता चल रही रही रियल संख्या
जनपद में 3,06,710 महिला-पुरुष कार्डधारक श्रमिक हैं। इसमें पिछले तीन सालों से 1,59,204 कार्डधारक महिला श्रमिक कार्य कर रहे थे, लेकिन ई-केवाईसी के माध्यम से इनकी संख्या कम हो रही है। इसमें कुछ श्रमिकों की मौत हो जाने के बाद 1.54 लाख श्रमिक की संख्या सामने आई है।
ई-केवाईसी श्रमिकों की सहूलियत के लिए की जा रही हैं, सभी श्रमिकों को ई-केवाईसी कराना अनिवार्य है। बिना ई-केवाईसी वाले श्रमिकों को काम नहीं दिया जाएगा। - अखिलेश चौबे, डीसी मनरेगा