बदायूं। जिले में सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) लगातार कम होते जा रहे हैं और डॉक्टर तेजी से सिजेरियन प्रसव (ऑपरेशन) की ओर रुख कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि सामान्य प्रसव में गिरावट और ऑपरेशन के मामलों में बढ़ोतरी पिछले एक वर्ष में काफी बढ़ी है। अक्तूबर 2024 तक जहां जिले में 434 ऑपरेशन हुए थे, वहीं इस बार यह संख्या बढ़कर 649 तक पहुंच गई। इसके विपरीत सामान्य प्रसव 2024 में 10,784 हुए, जो इस वर्ष घटकर 10,357 रह गए।
जिले के प्रमुख अस्पतालों में शामिल जिला महिला अस्पताल, सीएचसी बिल्सी और सीएचसी सहसवान में यह अंतर सबसे अधिक देखने को मिला है। जिला महिला अस्पताल में पिछले वर्ष 2,813 सामान्य प्रसव हुए थे, जबकि इस साल संख्या घटकर 2,610 रह गई। वहीं ऑपरेशन के मामले 378 से बढ़कर 495 हो गए, जो 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी है।
सीएचसी बिल्सी में भी स्थिति लगभग यही रही। वर्ष 2024 में यहां 2,136 सामान्य प्रसव दर्ज किए गए और केवल 17 ऑपरेशन हुए। इस वर्ष सामान्य प्रसव घटकर 1,197 पर आ गए, जबकि ऑपरेशन 36 तक हुए।
सीएचसी सहसवान की भी स्थिति चिंताजनक है। यहां पिछले साल 1,704 सामान्य प्रसव हुए और 20 ऑपरेशन, वहीं इस वर्ष 1,600 सामान्य प्रसव और 39 ऑपरेशन हुए।
दातागंज और बिसौली में भी ऑपरेशन बढ़ने का रुझान दिखा है। दातागंज में जहां पिछले वर्ष एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ, वहीं इस बार 14 ऑपरेशन हुए हैं। बिसौली में पिछले साल केवल चार ऑपरेशन हुए थे, जबकि इस बार यह संख्या बढ़कर 27 हो गई।
कई बार परिवार को डराकर कराया जाता है ऑपरेशन
सरकारी अस्पतालों में प्रसव को लेकर भर्ती महिलाओं के परिजनों को अक्सर उलझी हुई बातें बताई जाती हैं। उन्हें समझाया जाता है कि सामान्य प्रसव से जच्चा-बच्चा को खतरा हो सकता है और ऐसी स्थिति में अस्पताल जिम्मेदार नहीं होगा। घबराए परिजन परिस्थितियों को देखते हुए ऑपरेशन के लिए तुरंत सहमति दे देते हैं। कई बार मना करने पर उन्हें दूसरी जगह ले जाने तक की बात कही जाती है। ऐसा ही एक मामला रसूलपुर निवासी महेंद्र का था। उन्होंने अपनी पत्नी को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन कराने पर जोर दिया। जब उन्होंने मना किया तो उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। बाद में शहर के एक निजी अस्पताल में दिखाने पर उनकी पत्नी का सामान्य प्रसव कराया गया। वहां पर डाॅक्टर ने बताया कि इसमें ऑपरेशन की बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी।
डाॅक्टरों को निर्देशित किया जाएगा कि वह ध्यान दें कि जो सामान्य प्रसव हो सकते हैं उनमें अनावश्यक ऑपरेशन न करें। अगर जरूरत हो तभी ऑपरेशन करें। अगर ऐसी कोई भी शिकायत आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ