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Budaun News: विद्युत उपकेंद्र नहीं तो वोट नहीं, गांव में लगाए गए बैनर

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विद्युत उपकेंद्र नहीं तो वोट नहीं। लिखे बैनर। संवाद
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दबतोरी। क्षेत्र की न्याय पंचायत मुंसिया नगला के गांव भरतपुर, मुंसिया नगला, बीधा नगला में बैनर लगे हैं, जिन पर लिखा है ‘विद्युत उपकेंद्र नहीं तो वोट नहीं’। ये बैनर गांव के मुख्य चौराहों और प्रवेश द्वारों पर लगाए गए हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि वे अब नेताओं के खोखले वादों में आने वाले नहीं। पिछले लोकसभा चुनाव में स्थानीय नेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों ने इन गांवों के लोगों को जैसे-तैसे वोट डालने के लिए राजी कर लिया था। मतदान के बाद विद्युत उपकेंद्र बनवाने के लिए ललुआ नगला में जगह की पैमाइश भी कर ली गई, लेकिन कार्य आगे नहीं बढ़ सका। भ्रमित कर देने पर ग्रामीणों में बेहद नाराजगी है।
गांव वालों का कहना है कि दशकों से गर्मी के दिनों में क्षेत्र के उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज की समस्या रहती है। घंटों बिजली कटौती भी परेशान करती है। आवश्यकता अनुरूप बिजली न मिलने से बच्चों की पढ़ाई भी बाधित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां आवश्यकता थी वहां विद्युत उपकेंद्र का निर्माण नहीं कराया गया। राजनीतिक कारणों से परवेज नगर में विद्युत उपकेंद्र बना दिया गया है, जहां इसकी कोई आवश्यकता भी नहीं थी।
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मक्का उत्पादन में अग्रणी है दबतोरी क्षेत्र
दबतोरी क्षेत्र मक्का उत्पादन में अग्रणी इलाका है। पर्याप्त बिजली न मिलने और लो वोल्टेज के कारण किसानों के नलकूप नहींं चल पाते, जिससे किसानों की खड़ी फसलें सूख जाती हैं। किसानों को अल्टीनेटर लगाकर सिंचाई करनी पड़ती है।

रेलवे लाइन के पार होने के कारण आ रही समस्या
ग्रामीणों ने बताया कि जिले के अंतिम छोर के गांव भरतपुर, करेंगी, दौलतपुर, मोतीपुरा, ललुआ नगला, मुंसिया नगला, बीधा नगला, दबतोरी, दबतोरा, लक्ष्मीपुर, संग्रामपुर, बिजौरी, सिरसावा, धनूपुरा करला वाला आदि बरेली-चंदौसी रेलवे लाइन के पार उत्तर दिशा में हैं। रेलवे की अनुमति के बगैर लाइन पार करके बिजली आपूर्ति नहीं दी जा सकती। इसलिए आसफपुर विद्युत उपकेंद्र से ही सप्लाई जारी है।
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