बदायूं। ग्रामीणों इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लिए जिले में दस साल पहले 43 न्यू पीएचसी का शुभारंभ किया गया था लेकिन विभाग इन पर अब तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं कर सका है।
लिहाजा महज सात न्यू पीएचसी पर ही डॉक्टरों की तैनाती है बाकी जगह स्टाफ का टोटा है। कुछ पर स्टाफ तैनात भी है तो वह कभी कभार ही स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचता है। अनदेखी की वजह से ज्यादातर न्यू पीएचसी पर या तो उपले पाथे जा रहे हैं या फिर ग्रामीण अपने जानवर बांधते हैं।
रिकॉर्ड में स्टाफ पर आता कोई नहीं
ओरछी। क्षेत्र के गांव सिसरका में स्वास्थ्य केंद्र को बने करीब 10 साल हो गए। मगर यहां स्वास्थ्यकर्मी कभी दिखाई नहीं दिए, जबकि रिकॉर्ड में यहां स्टाफ की तैनाती है। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है।
खितौरा में लटका रहता है ताला
उघैती। क्षेत्र के गांव खितौरा में बनी न्यू पीएचसी से करीब 15 गांव जुड़े हैं। बड़ा इलाका होने की वजह से यहां पर डॉक्टर, फार्मासिस्ट, एलटी सभी तैनात हैं, इसके बाद भी यहां ताला लटका रहता है। मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। न्यू सीएचसी परिसर में गंदगी की वजह से मच्छरों का प्रकोप ज्यादा रहता है। यहां जगह-जगह गंदगी फैली हुई है।
दो केंद्रों की जिम्मेदारी पर चला रहे निजी क्लिनिक
कादरचौक। क्षेत्र के गांव बेहटा डंबरनगर, मोहम्मदगंज, बादुल्लागंज बड़ी आबादी वाले गांव हैं। यहां बादुल्लागंज और असरासी की न्यू पीएचसी का जिम्मा एक ही डॉक्टर पर है। तीन-तीन दिन दोनों स्थानों पर मरीजों को देखने का जिम्मेदारी होने के बावजूद यहां तैनात डॉक्टर अपने गांव में निजी क्लिनिक चला रहे हैं।
नौली हरनाथपुर में स्टाफ नहीं, गिधौल में कभी-कभार ही आता है
बगरैन/अलापुर। बगरैन क्षेत्र के गांव नौली हरनाथपुर में बनी न्यू पीएचसी पर कोई डॉक्टर तैनात नहीं है न ही यहां फार्मासिस्ट है। यहां मात्र एक महिला स्वास्थ्यकर्मी की तैनाती है, वह भी केंद्र पर नहीं पहुंचती हैं तो यहां दवाएं भी नहीं मिलती हैं। इसी तरह अलापुर क्षेत्र के गांव गिधौल की न्यू पीएचसी पर स्टाफ पूरा है लेकिन कभी-कभार ही केंद्र पर पहुंचता है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल
- डॉक्टरों के पद - 204
- स्वास्थ्य विभाग में तैनात डॉक्टर - 61
- न्यू पीएचसी - 43
- सीएचसी - 16
- पीएचसी - 15
- स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की बेहद कमी है। इसके चलते न्यू पीएचसी पर डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो पा रही है। सीमित संसाधनों में ही कार्य कराया जा रहा है। डॉक्टरों की मांग की गई है ताकि सभी न्यू पीएचसी पर तैनाती की जा सके। - डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ