नलकूप विभाग अपने कर्मचारियों के प्रति कितना संवेदनशील है। इसका उदाहरण सामने है। जहां एक ओर गेस्टहाउस चकाचक करा लिया गया और कार्यालय मेंटीनेंस को 35 लाख की दरकार की गई है, वहीं कर्मचारियों के 61 आवासों की मरम्मत की कोई सुध नहीं ली गई है। जबकि आवास इतने जर्जर हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
लोकतांत्रिक प्रबंधन से दूर हो रहे नलकूप विभाग के कर्मचारी एक दशक से जर्जर आवासों में रहने को मजबूर हैं। हाल ही में एक आवास की छत अभी बरसात से पूर्व ही ढह गई। सोचो बरसात में क्या हाल होगा।
पिछले 10 सालों में कर्मचारियों के आवास की मरम्मत के नाम पर कुछ नहीं मिला। विभाग के गेस्ट हाउस की साजसज्जा और उसकी मरम्मत पर लाखों खर्च हो गए। यही नहीं अधिकारियों के बंगले भी चकाचक हैं। ये सौतेला व्यवहार कर्मचारियों के साथ क्यों?
हाल ही में लखनऊ की बैठक में नलकूप विभाग प्रथम खंड के एक्सईएन को बुलाया गया है। जहां विभागीय कार्यालस मेंटीनेंस को 35 लाख रुपये स्वीकृत किए जाने की तैयारी हुई। कर्मचारी आवासों की तो चर्चा तक नहीं हो सकी।
शिकायत की तो मिला नोटिस
कर्मचारियों के आवास इतने जर्जर हैं कि कभी भी धराशाही हो सकते हैं। कर्मचारी हर साल अपने आवासों की मरम्मत की मांग करते हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। हाल ही में शेर सिंह कर्मचारी का आवास ढह गया। उसकी दो बेटियां बच गईं। शिकायत की तो अधिकारियों ने निदान की जगह कर्मचारियों को आवास खली करने को नोटिस जारी कर दिए। इसके पीछे था कि कभी कोई घटना हो जाए तो वे न फंस सके।
अध्यक्ष राज्य कर्मचारी संयुक्त मोर्चा मदन मुरारी गुप्ता ने बताया कि अभी किसी कर्मचारी ने उनसे बात नहीं की है। कर्मचारियों की समस्या है तो बताना चाहिए। मैं भी बाहर होने के कारण अभी तक अधिकारियों से बात नहीं कर सका हूं। कल ही अधिकारियों से बात करूंगा।