बदायूं। बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर एहतियात के तौर पर शनिवार और रविवार के कर्फ्यू के बीच मुनाफाखोरी भी होने लगी है। दवाओं से लेकर सब्जियों, पान मसाला, गुटखा, सिगरेट आदि की कीमतों में अचानक से इजाफा हो गया है। दरअसल, जिस तरह से कोरोना की रफ्तार बढ़ रही है। उसके बाद कई दिन के पूर्ण लॉकडाउन की आशंका बनी हुई है। ऐसे में थोक के साथ फुटकर दुकानदारों ने भी स्टॉक करना शुरू कर दिया है।
पिछले वर्ष तीन महीने के लॉकडाउन के दौरान जमकर मुनाफाखोरी हुई थी। दोगुने दामों पर खाने-पीने के सामानों के साथ अन्य जरूरी चीजों की बिक्री हुई थी। ऐसे में मुनाफाखोर एक बार फिर से उसी तरह से मोटी कीमतें वसूलना चाहते हैं। स्टॉक करके बाजार में जरूरी सामानों की किल्लत पैदा की जा रही है। शनिवार के बाद रविवार को भी कर्फ्यू रहा। हालांकि, सप्ताहांत कर्फ्यू के दौरान सरकार ने जरूरी सेवाओं को छूट दी है। इसके बाद भी दामों में इजाफा हो रहा है। पान मसाला, गुटखा, बीड़ी-सिगरेट की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है। सब्जियां भी महंगी होती दिख रही हैं। खाने-पीने के अन्य सामानों की भी जमाखोरी होने से कीमतों पर असर हो रहा है।
थोक व्यापारियों की मानें तो दो दिन के सप्ताहांत कर्फ्यू के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में कीमतें बढ़ रही हैं। वहीं फुटकर व्यापारियों का कहना है कि थोक व्यापारियों से उनको ही सामान महंगा मिल रहा है।
व्यापारियों की बात
कोरोना संक्रमण के कारण रात्रि कर्फ्यू के साथ सप्ताह में दो दिन के सप्ताहांत कर्फ्यू का असर दूसरे जिलों और राज्यों से होने वाली सप्लाई पर पड़ रहा है। खाने-पीने की जिन चीजों की सप्लाई प्रभावित नहीं हो रही, उनके दामों में इजाफा नहीं हुआ है। - महेश गुप्ता, थोक किराना व्यापारी
पिछले वर्ष भी लॉकडाउन में काफी जमाखोरी हुई थी। खाने-पीने के सामानों के साथ पान मसाला, गुटखा, बीडी-सिगरेट की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो गई थीं। बाजार को एक बार फिर से लंबे लॉकडाउन का अंदेशा बना हुआ है। ऐसे में कीमतें बढ़ रही हैं। - मदन मौर्य, व्यापारी
पिछले वर्ष पान मसाला, गुटखा, बीड़ी-सिगरेट की बिक्री पर ही पाबंदी लगा दी गई थी। व्यापारियों को आशंका है कि इस बार भी ऐसा हो सकता है। ऐसे में उन्होंने माल का स्टॉक कर लिया है। जो माल बाजार में आ रहा है, उसकी ज्यादा कीमत ली जा रही है। - सचिन, व्यापारी
आपूर्ति और खपत में अंतर का एक कारण जमाखोरी है। पिछले साल भी लॉकडाउन में जमाखोरी हुई थी। इस बार भी कुछ बड़े व्यापारी उसी तरह से जमाखोरी कर मनमाफिक कीमतें वसूलना चाहते हैं। इस कारण आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं। - संदीप व्यापारी