बदायूं। जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट) में शनिवार को नवजात की मौत हो गई। परिवार वालों ने एसएनसीयू के स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत की है। शिकायत पर सीएमएस डॉ. पुष्पा पंत त्रिपाठी ने जांच कमेटी का गठन कर दिया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सहसवान के गांव लवेदपुर निवासी 27 वर्षीय ममता पत्नी संतोष का मायका शहर के मोहल्ला शिवपुरम की गली नंबर पांच में है। दिवाली पर ममता अपने मायके आई थीं। वह गर्भवती थी। 31 अक्तूबर को प्रसव पीड़ा होने पर ममता को मायके वालों ने जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया। उसी दिन सामान्य प्रसव से ममता ने बच्ची को जन्म दिया। जन्म के समय जच्चा-बच्चा स्वस्थ थे, लेकिन नवजात का वजन औसत से कम होने पर डॉक्टर ने उसे महिला अस्पताल के केएमसी (कंगारू मदर केयर) में भर्ती करने की सलाह दी।
शुक्रवार को नवजात को केएमसी से एसएनसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। सुबह करीब 10 बजे नवजात की मौत हो गई। परिवार वालों का कहना है कि उन्होंने एसएनसीयू में तैनात स्टाफ से कई बार डॉक्टर को बुलाने की फरियाद की, लेकिन डॉक्टर को नहीं बुलाया गया। नवजात की मौत के बारे में उन्हें बताया भी नहीं गया, बल्कि हालत गंभीर होना बताते हुए रेफर करने की बात कही गई।
परिवार वालों की शिकायत पर सीएमएस डॉ. पुष्पा पंत त्रिपाठी ने जांच कमेटी बना दी है। जांच कमेटी सभी पहलुओं की पड़ताल करने के बाद एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट आने के बाद संबंधितों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कम था नवजात का वजन
जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमार वायु ने बताया कि बच्चा प्रीमेच्योर होने के साथ उसका वजन भी औसत से काफी कम था। वजन मापने पर करीब एक किलो नौ सौ ग्राम पाया गया। कम वजन के बच्चे को केएमसी भेजा जाता है। प्रसव के बाद नवजात के रक्त की जांच कराई तो वह पीलिया ग्रस्त पाया गया था। केएमसी में हालत में कुछ सुधार के बाद नवजात को एसएनसीयू में भेजा गया था जहां उसकी मौत हो गई।
एसएनसीयू में नवजात की मौत की शिकायत मिली है। जांच कमेटी बना दी गई है। प्रथम दृष्टया जांच में पाया गया है कि बच्चे का वजन कम होने के साथ वह प्रीमेच्योर भी था। रक्त की जांच में बच्चे को पीलिया की भी पुष्टि हुई थी। शिकायत मिलने के बाद जांच कमेटी बना दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. पुष्पा पंत त्रिपाठी, सीएमएस