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आदेश थे एनसीईआरटी के... खपा दी गईं प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें

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बदायूं। शासन ने वर्ष 2019 में सभी सरकारी विद्यालयों को पुस्तकालय के लिए बजट आवंटित किया गया था। इसमें आवंटित धनराशि से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय को एनसीईआरटी की किताबें खरीदने को कहा गया था। मगर शिक्षा माफिया ने शासन की इस मंशा पर पानी फेर दिया। माफिया ने एनसीईआरटी के बजाय प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें सरकारी विद्यालयों में खपा दीं। शिकायत पर इसकी जांच भी हुई, जो बाद में फाइलों में दबा दी गई।
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सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को स्कूली किताबों के अलावा महापुरुषों की जीवनी, कहानियां, ज्ञा नवर्धक पुस्तकें और पत्र-पत्रिकाएं पढ़ने को उपलब्ध कराना था। इनके अतिरिक्त कोर्स में बाल गीत, एकांकी, चित्रकला, एटलस, शब्द कोष आदि पुस्तक भी शामिल थी। इसके पीछे शासन का उद्देश्य था कि बच्चों को किताबी से इतर ज्ञान भी हासिल हो सके। इसके लिए शासन ने सभी प्राथमिक विद्यालयों को पांच और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के एसएमसी खाते में 10-10 हजार रुपये भेजे थे। इन रुपयों से एसएमसी के माध्यम से शिक्षकों को एनसीईआरटी की पुस्तकें बाजार से खरीदने का आदेश था। इसकी जानकारी शिक्षा माफिया को को हुई, तो उसने अधिकारियों और विद्यालयों के शिक्षकों से संपर्क साधा। सांठगांठ के आधार पर विद्यालयों में लाइब्रेरी के लिए प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें को खपाना शुरू कर दिया, साथ ही अवैध उगाही होने लगी। कई जगह इसका विरोध हुआ, तो कुछ जनप्रतिनिधियों से दबाव डलवाकर पेमेंट की उगाही करना शुरू कर दी। तब कुछ लोगों ने इसकी शिकायत शासन-प्रशासन से क थी, जिसके बाद जिला प्रशासन ने इस मामले की जांच शुरू कर दी। किताबों की जांच होने का मामला संज्ञान में आने पर शिक्षकों ने इसका पेमेंट नहीं किया, लेकिन अभी तक यह जांच पूरी नहीं हो सकी है।
नहीं थी किसी से खरीदने की बाध्यता
शासन ने जब परिषदीय स्कूलों के लिए लाइब्रेरी के लिए एनसीईआरटी की किताबों के खरीदने के लिए धनराशि दी थी, तो उन्होंने इस बात को साफ कहा था कि इन किताबों को खरीदने के लिए किसी दुकान की बाध्यता नहीं है। जहां से मर्जी आए, वहां से इन किताबों को खरीद सकते हैं, क्योंकि सरकारी किताबों की कीमत हर जगह एक ही थी।
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कुछ विद्यालयों ने स्वयं खरीदी थी किताबें
जिले के कुछ चुनिंदा विद्यालय ही ऐसे हैं, जहां पर एसएमसी के माध्यम से शिक्षकों ने खुद ही किताबों की खरीदारी की गई। यहां पर बच्चों को उन किताबों से अतिरिक्त ज्ञान देने की कोशिश की जा रही है।
डीएम ने निर्देश पर इसकी जांच एसडीएम स्तर से की जा रही है। उनकी तरफ से अभी तक हमें कोई आख्या प्राप्त नहीं हुई, जिससे इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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- रामपाल सिंह, बीएसए
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