वजीरगंज (बदायूं)। नगर से आंवला की ओर लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर टीले पर मां का विशाल भव्य मंदिर स्थित है तथा ये अभिलेखों में गैर आबाद मई भवानीगंज के रकबे में दर्ज है। मंदिर में प्रवेश के लिए चार द्वार बने हैं।
प्राचीन ब्रह्मदेव अर्थात पीपल का वृक्ष भी मंदिर के इतिहास का साक्षी है। परिसर के मध्य में स्थित माता का मंदिर है। पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न मूर्तियों के रूप में साक्षात महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती के रूप में विराजमान है, जो श्रद्धालुओं की सभी मनोकामना पूर्ण करतीं हैं। मंदिर पर प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं का तांता लगता है।
पुजारी वीरू ने बताया कि माता रानी के दरबार में बहुत दूर-दूर से हजारों भक्तगण आते हैं। जिनकी मनोकामना पूर्ण होती हैं वे माता रानी को चुनरी और नारियल चढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि माली परिवार सात पीढ़ियों से माता रानी के मंदिर की सेवा कर रहा है। महंत नारायण गिरी बताते हैं कि मंदिर बहुत प्राचीन है, जिसका द्वापर युग के इतिहास में वर्णन मिलता है। बताते हैं कि यहां पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय व्यतीत किया था। उन्होंने बताया कि माता रानी के दर्शन का लाभ तभी मिलता है जब श्रद्धालु बरी बाबा के दर्शन करते हैं। साल में एक बार यहां मेला भी लगता है। नवरात्र पर श्रद्धालुओं की संख्या यहां और ज्यादा बढ़ जाती है।