बदायूं। जनपद न्यायालय परिसर में 9 मई को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से वादों का त्वरित निस्तारण करना है। यह आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों पर हो रहा है।
प्रभारी सचिव नेहा गर्ग ने बताया कि लोक अदालत में किसी भी प्रकार का न्याय शुल्क नहीं लगता है। उन्होंने यह भी बताया कि लंबित वादों के निस्तारण पर पहले जमा न्याय शुल्क वापस मिल जाता है। लोक अदालत के निर्णय के खिलाफ कोई अपील नहीं होती, जिससे पक्षकारों को त्वरित और अंतिम न्याय मिलता है। इसकी प्रक्रिया सरल, सुलभ और आपसी सहमति पर आधारित है। इसमें सिविल, आपराधिक शमनीय, राजस्व, धारा 138 पराक्रम्य लिखत अधिनियम से संबंधित मामले निपटाए जाएंगे। बैंक वसूली, मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाएं, पारिवारिक और श्रम वाद भी शामिल होंगे। भूमि अधिग्रहण, विद्युत, जलकर और दूरसंचार बिल से जुड़े विवादों का भी निस्तारण होगा। ऐसे विवाद जो अभी न्यायालय में नहीं पहुंचे हैं, उन्हें भी वाद-पूर्व स्तर पर सुलह-समझौते से निपटाया जा सकता है।
निपटाए जाने वाले मामले और जनभागीदारी की अपील
इस लोक अदालत में सिविल प्रकृति के वाद, आपराधिक शमनीय वाद और राजस्व वाद शामिल हैं। धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, बैंक वसूली और मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाएं भी निपटाए जाएंगे। पारिवारिक, श्रम, भूमि अधिग्रहण, विद्युत, जलकर और दूरसंचार बिल से संबंधित विवादों का भी निस्तारण होगा। नागरिकों और वादकारियों से अपील की गई है कि वे अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपने वादों का निस्तारण कराएं।