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सांसद नरेंद्र और हीरालाल कश्यप बसपा से निष्कासित

Thu, 19 May 2016 11:47 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
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छह अप्रैल को गोली लगने से हिमानी की संदिग्ध परिस्थिति में हो गई थी मौत
कोर्ट केस बावजूद दोनो पक्षों में अभी तक चल रहा आरोप-प्रत्यारोप का दौर
हाईकमान ने माना दोनों की वजह से उनकी पार्टी की हो रही थी किरकिरी
 बसपा ने सांसद नरेंद्र कश्यप और पूर्व मंत्री हीरा लाल कश्यप को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। दोनों नेताओं के आपसी झगड़े में पार्टी को हो रहे नुकसान की वजह से बृहस्पतिवार को उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। हीरा लाल ने अपने बेटी की मौत पर उसके ससुर नरेंद्र कश्यप, सास देवेंद्री और पति डा. सागर समेत 6 के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने निष्कासन पत्र संबंधित जिलों की पार्टी कार्यकारिणी को भेज दिया है। 
बदायूं के मोहल्ला ब्राह्मपुर निवासी हीरालाल कश्यप की पुत्री हिमांशी का विवाह गाजियाबाद निवासी राज्यसभा सदस्य नरेंद्र कश्यप के पुत्र सागर कश्यप के साथ हुआ था। गत माह हिमांशी की ससुराल में मौत हो गई। इस पर हीरालाल कश्यप ने पुत्री के ससुरालियों पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला अभी तक चल रहा है। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि नरेंद्र व हीरा लाल के आपसी झगड़े की वजह से पार्टी को हो रहे नुकसान को देखते हुए दोनों को पार्टी से निष्कासित किया गया है। हीरा लाल ने अपनी बेटी की मृत्यु को लेकर नरेंद्र कश्यप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह जांच का विषय है। दोनों का विवाद इस समय न्यायालय में विचाराधीन है और दोनों ही बसपा से जुड़े हुए हैं। मृत्यु को लेकर भी वे एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इससे पार्र्टी की छवि खराब हो रही है। हीरा लाल, कश्यप समाज और मीडिया के माध्यम से जो रिपोर्ट मिल रही है, वह काफी चिंताजनक है। इसकी गंभीरता को देखते हुए नरेंद्र कश्यप और हीरा लाल कश्यप को बसपा से निष्कासित कर दिया गया है।
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पार्टी का वफादार सिपाही: हीरालाल
बदायूं। अपने निष्कासन के संबंध में पूर्व दर्जा राज्यमंत्री हीरालाल कश्यप का कहना है कि उनकी बेटी की हत्या हुई है। आरोपी सांसद और उनका बेटा जेल में है। मैंने बेटी को खोया है। इस पीड़ा को बयां नहीं किया जा सकता। रही बात उनके निष्कासन की तो वह पार्टी के वफादार सिपाही हैं। अपने निष्कासन के बारे में पार्टी हाईकमान से बात करके अपना पक्ष रखेंगे। उन्हें उम्मीद है कि उनका निष्कासन वापस होगा।
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