उझानी (बदायूं)। नरऊ वालों को दूषित पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए खोदे गए नाले का एक हिस्सा पहले ट्रायल में ही जवाब दे गया। फसलों को नुकसान की आशंका के मद्दनेजर मनरेगा के मजदूरों ने आनन फानन में नाले पर बनी मिट्टी की दीवार को दुरस्त कर दिया लेकिन इसके चलते फिलहाल नये नाले में पानी का प्रवाह रोक दिया गया है। बावजूद इसके जेसीबी मशीनें नाले की खुदाई में जुटी हुई हैं।
कस्बे से सटे नरऊ गांव में दूषित पानी की समस्या ने ग्रामीणों को परेशानी में डाल रखा था। पानी पीते रहने से लोगों में बीमारियां फैलीं तो महिला समेत चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद हरकत में आए अफसरों ने मान लिया था कि उझानी के नाले का पानी नरऊ के तालाब में पहुंचने से पहले ही रोक कर दूसरी तरफ मोड़ दिया जाए तो भू-गर्भ का पानी दूषित नहीं होगा। इसके बाद ही 18 फरवरी से कादरचौक रोड किनारे गांव फतेहपुर की ओर नाले की खुदाई शुरू कराई गई। अब तक दो-ढाई किलोमीटर तक नाले की खुदाई का काम पूरा हो चुका है। सोमवार को पालिका ने नाले में पानी छोड़ने के लिए ट्रायल शुरू किया तो नाले पर बनी मिट्टी की दीवार ढह गई। मनरेगा के मजदूरों ने कोशिश कर उसे दुरस्त तो कर लिया लेकिन फिलहाल नाले में पानी रोक दिया गया है। ईओ डॉ. डीके राय ने बताया कि मिट्टी सूखी होने की वजह से दिक्कत आई है लेकिन रुक-रुक कर नाले में पानी छोड़ा जाएगा तो वह नहीं ढह पाएगा।
जमीन सतह से नाले की ऊंचाई अधिक होने से बढ़ी दिक्कत
उझानी। नरऊ मोड़ के पास से फतेहपुर की ओर नाले की जहां तक खुदाई की जा चुकी है, जमीनी सतह से उसकी ऊंचाई तालाब वाले इलाके की जमीनी सतह से अधिक है। जेसीबी ने हालांकि खुदाई करके गहराई को बढ़ा दिया है लेकिन ट्रायल के दौरान नाले में जब पानी छोड़ा गया तो वह लबालब हो गया। पानी एक किलोमीटर तक ही बढ़ पाया। इसी दिक्कत के चलते अब नरेगा के मजदूरों के जरिए नाले पर बनी मिट्टी की दीवार को पुख्ता करना शुरू कर दिया गया है।