दांपत्य जीवन की शुरूआत में साथ जीने और मरने की कसमें खाने वाले उम्र के चाहे जिस पड़ाव से गुजर रहे हों, लेकिन उनका एक-दूसरे के प्रति लगाव कम नहीं होता। अनूठे प्रेम की मिसाल बने इलाके के गांव खेड़ा हुसैनपुर के बुजुर्ग दंपति ने इसे एक बार फिर ताजा कर दिया। 60 वर्षीय किसान ओमकार ठाकुर को हार्टअटैक पड़ा, तो घरवाले इलाज के लिए उन्हें अस्पताल ले गए। होनी को कुछ और ही मंजूर था। ओमकार को बचाया ना जा सका। उनकी मौत के समय वहीं मौजूद पत्नी नन्हीं देवी पल भर बाद ही गश खाकर गिर पड़ीं। पति वियोग में शव के पास ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
दंपति की मौत का मामला बुधवार सुबह का है। कोतवाली क्षेत्र के गांव खेड़ा हुसैनपुर निवासी ओमकार ठाकुर की तड़के अचानक तबियत खराब हुई, तो घरवाले उसे यहां प्राइवेट डॉक्टर के पास ले आए। डाक्टर ने ब्लड प्रेशर अधिक बताकर इलाज को बाहर ले जाने की सलाह दी। पत्नी नन्ही देवी ने देवर अजयपाल के सहयोग से ओमकार को जिला अस्पताल ले गईं। सुबह में करीब नौ बजे ओमकार की मृत्यु हो गई। शव के पास ही मौजूद नन्हीं बिलखने लगीं। वह रोते-रोते बेहोश हो गईं। देवर समेत साथ मौजूद घरवाले कुछ समझ पाते, उससे पहले ही नन्हीं ने दम तोड़ दिया। घरवालों ने हालांकि उन्हें डॉक्टरों को भी दिखाया, लेकिन तब तक उनका शरीर ठंडा पड़ चुका था।
बताया जाता है कि दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे। यहां तक कि दोनों खेत पर भी साथ-साथ जाते थे। उनकी तीन संतान में दो बेटे और एक बेटी है, लेकिन मौत के वक्त तीनों में से कोई भी उनके पास नहीं था। बेटों में विष्णु अलीगढ़, तो कल्लू गाजियाबाद में कामकाज करता है। बेटी गुड़िया ससुराल में थी। दोपहर बाद ओमकार और नन्हीं का शव पैतृक घर पहुंचा, तो खेड़ा हुसैनपुर समेत आसपास गांवों के लोगों का उन्हें देखने के लिए तांता लग गया। बेटे और बेटी भी रोते-बिलखते आ गए। इधर, कछला पुलिस चौकी इंचार्ज सुभाष यादव ने बताया कि घरवालों ने दंपति के शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया है।
इंसेट
...तब ओमकार ने कहा था, कैसे जियोगी तुम
उझानी। ओमकार ठाकुर की दो दिन पहले भी मामूली रूप से तबियत खराब हो गई थी। बेचैनी की शिकायत पर पत्नी नन्हीं देवी ने सिर में तेल डालकर मालिश कर दी। शाम को ओमकार ने पत्नी से कहा कि अब ज्यादा दिन तक साथ नहीं निभा पाऊंगा, तुम कैसे जियोगी.. उस वक्त बात आई-गई हो गई, लेकिन ईश्वर को तो कुछ और ही मंजूर था। अब देखिए ना, ओमकार के दम तोड़ते ही पत्नी नन्हीं की जीवन लीला समाप्त हो गई।