मूसाझाग थाना परिसर में क्वार्टर की छत पर से छात्रा को फेंके जाने के मामले में अभी बहुत कुछ सामने आना बाकी है। यह बात पुलिस भी जानती है, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं। विवेचक ने ब्लैकमेल किए जाने की बात को बड़े सहज अंदाज में यह कह दिया कि छात्रा को शादी के झांसे में ले लिया गया था। सिपाही एंड्रायड फोन चलाता था। चर्चा इस बात की भी है कि बिटिया की हकीकत और सिपाही की करतूत उसी सेट में कैद है, जिसमें नाजुक पलों को कैद कर सिपाही ब्लैकमेल कर रहा होगा।
15 जनवरी को नगर निवासी छात्रा को क्वार्टर पर बुलाकर उसे छत से फेंके जाने के मामले में नामजदगी के बाद से जेल में बंद सिपाही गौरव टाइटलर के एंड्रायड सेट फोन को लेकर पिछले दिनों भी लोगों की जुबां पर चर्चा रही। पुलिस ने टाइटलर के सेलफोन नंबर की सिम के नंबर की कॉल डिटेल तो हासिल कर ली, लेकिन एंड्रायड फोन को कब्जे में लेने की जरूरत नहीं समझी। पुलिस की अब तक की जांच में भी एंड्रायड फोन का जिक्र भी नहीं आया है। सूत्रों की मानें तो टाइटलर अपने पास दो सेट रखता था। एंड्रायड फोन का इस्तेमाल वह विशेष परिस्थितियों में करता था।
बताया जाता है कि एंड्रायड फोन में बिटिया से जुड़ी कुछेक जानकारियों के साथ सिपाही की करतूत भी कैद है। टाइटलर के करीबी सिपाही के जरिए कोतवाली पुलिस को घटना वाले दिन ही सबकुछ पता लग गया था, लेकिन पुलिस ने हकीकत को अपने हिसाब से मोड़ दे दिया। लिहाजा उस वक्त एंड्रायड फोन को लेकर गौर नहीं किया गया।
इधर, विवेचना कर रहे कोतवाल देवराज राठी कहते हैं कि छात्रा को सिपाही ने ब्लैकमेल महज यह कहकर किया था कि वह उससे शादी कर लेगा। छात्रा को लगा कि सिपाही गुमराह कर रहा है तो उसने विरोध किया। विरोध करने पर ही छात्रा को छत से फेंक दिया गया।
161 को तस्दीक करेगा 164 का बयान
उझानी। जानकारों की मानें तो बिटिया ने विवेचक को अब तक जो कुछ बताया है, वह उसे 164 का बयान दर्ज कराते वक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष भी दोहराना होगा। विवेचना में भले ही रेप और पाक्सो की धाराएं जोड़ दी गई हैं, लेकिन बिटिया मजिस्ट्रेट के सामने 161 के बयान को जोड़ते हुए आगे कुछ और भी कहती है तो उसे भी केस में शामिल कर लिया जाएगा। वैसे, पूरे घटनाक्रम में कोतवाली पुलिस शुरू से ही लेटलतीफ रही है।
आरोपी सिपाही, पीड़िता के सैंपल नहीं लिए
बदायूं। उझानी कोतवाली की छत से बलात्कार के बाद छात्रा को फेंके जाने के मामले में पुलिस की एक और करतूत सामने आई है। छात्रा को छत से फेंकने वाले सिपाही को बचाने के चक्कर में तत्कालीन कोतवाल रामसूरत यादव आरोपी और पीड़िता के शरीर से डीएनए सैंपल के लिए नमूने लेना भी भूल गए। सिपाही को बिना नमूने लिए ही जेल भेज दिया गया। इसके सैंपल लेने के लिए अब कोर्ट से इजाजत लेनी होगी।
आरोपी सिपाही को गिरफ्तार करने के बाद इसको 17 जिला अस्पताल में मेडिकल करा कर इसे जेल भेज दिया गया था। उस समय पुलिस ने कहा था कि आरोपी के नमूने जांच के लिए ले लिए गए हैं। वही पुलिस अब इससे इंकार कर रही है। इधर, छात्रा के शरीर से भी अब तक सैंपल नहीं लिए गए हैं। मामले की विवेचना कर रहे उझानी कोतवाल देवराज राठी ने बताया कि उस समय बलात्कार की बात सामने नहीं आई थी। सिपाही के खिलाफ सिर्फ हत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया गया था। अब बलात्कार की बात सामने आई है। आरोपी की 31 जनवरी को पेशी है। कोर्ट से उसके सैंपल लेने के लिए इजाजत मांगी जाएगी।
पुलिस की हीलाहवाली
उजागर, अर्जी खारिज
बदायूं। पुलिस की हीलाहवाली के चलते गुरुवार को भी उझानी रेपकांड की शिकार घायल छात्रा के बयान दर्ज नहीं हो सके। उझानी थाने के सिपाही गौरव टाइटलर ने रेप के बाद छात्रा को क्वार्टर की छत से फेंक दिया था। उसे गंभीर हालत में बरेली रेफर किया गया था। हालत में सुधार होने पर दो दिन पहले छात्रा को जिला अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। विवेचक की ओर से लगाई गई अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
मामले की जांच कर रहे देवराज राठी ने छात्रा के कलमबंद बयान दर्ज कराने के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई थी। इसमें कहा गया था कि किसी मजिस्ट्रेट को जिला अस्पताल भेजकर छात्रा के बयान दर्ज करा लिए जाएं। कोर्ट ने उनसे पूछा कि किस प्रावधान के तहत यह संभव है तो विवेचक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी। सूत्रों की मानें तो पुलिस अब भी सिपाही को बचाने में जुटी हुई है। मजिस्ट्रेट के सामने बयान देने में पीड़िता को आजादी रहेगी जबकि अस्पताल में बयान के दौरान पुलिस उसे प्रभावित कर सकती है।
1,290 जांचों के बाद खुलेंगी
मूसाझाग कांड की परतें
बदायूं। चर्चित मूसाझाग कांड की कई सच्चाइयां सामने आने में अभी वक्त लगेगा। आरोपियों के सैंपल विधि विज्ञान प्रयोगशाला डीएनए जांच के लिए भेजे गए हैं। प्रयोगशाला में हजारों नमूने जांच के लिए लंबित हैं। इससे आरोपी बर्खास्त सिपाहियों और पीड़िता के नमूनों की डीएनए जांच रिपोर्ट मिलने में देरी से इंकार नहीं किया जा सकता। जाहिर है कि ऐसे में चार्जशीट में भी देरी हो सकती है।
मूसाझाग थाने में 31 दिसंबर की रात नाबालिग से सिपाही वीरपाल यादव और अवनीश यादव ने गैंगरेप किया था। दोनों सिपाहियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बाद में इनको बर्खास्त कर दिया गया। घटना से जुड़े कई सच जानने के लिए पुलिस ने दोनों बर्खास्त सिपाहियों और पीड़िता के शरीर के सैंपल जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे थे। सूत्रों की मानें तो इन नमूनों की जांच से पहले प्रयोगशाला में 1,290 नमूनों की जांच होनी है। इसके बाद मूसाझाग कांड से जुड़े नमूनों की जांच होगी। मामले की विवेचना कर रहे एसओ मूसाझाग अशोक सिंह भी मान रहे हैं कि अगर प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने में देरी होती है, तो कुछ तथ्य भी देर से सामने आएंगे। हालांकि उनका दावा है कि चार्जशीट वक्त पर दाखिल कर दी जाएगी।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला के लिए रिमाइंडर भेज कर मूसाझाग कांड से जुड़ी जांचें प्राथमिकता के आधार पर करने को कहा गया है। प्रयोगशाला में दो तरह की जांचे होती हैं। एक सामान्य और एक अर्जेंट मूसाझाग मामले को अर्जेंट जांच में शामिल कराने की कोशिश की जा रही है।
-लल्लन सिंह, एसपी सिटी