नगर पालिका परिषद के शॉपिंग कॉम्पलेक्स की हालत खस्ताहाल हो गई है। कॉम्पलेक्स में आवाजाही को देखते हुए हर वक्त खौफ का साया मंडराता रहता है। बरामदे के पिलर और छत ढहने की कगार पर हैं।
शॉपिंग कॉम्पलेक्स मार्केट करीब चार दशक पहले अस्तित्व में आया था। उस वक्त पालिका प्रशासन ने कॉम्पलेक्स में 50 दुकानों का निर्माण कराके दो रास्ते भी निकलवाए थे, जो मुख्य बाजार में घंटाघर और नया बाजार में खुलते हैं। कॉम्पलेक्स की बरामदे के फर्श की दयनीय स्थिति एक दशक से है, लेकिन पांच-छह साल से बरामदे की छत से सीमेंट की परतें टूटकर गिरनी शुरू हुईं, जिसका सिलसिला बरकरार है। हालांकि ज्यादातर दुकानदारों अपने प्रतिष्ठानों की छत के आगे बरामदे की ऊपरी सतह की मरम्मत करा ली जो बरसाती पानी के भराव की वजह बन गई।
बता दें कि पालिका ने बरामदे और दुकानों के आगे फर्श की मरम्मत कराने के लिए टेंडर भी करा लिए थे। बात दुकानदारों को पता लगी, तो कुछेक ने नये सिरे से बरामदे का निर्माण कराने की आवाज उठा दी। बात आगे बढ़ी तो मरम्मत का काम भी लटक गया। जेई विनय सक्सेना की मानें तो पालिका मरम्मत कराने को पहले ही पहल कर चुकी है। नये सिरे से बरामदे का निर्माण कराने के लिए फिर से टेंडर कराना पड़ेगा।
गैस बुकिंग ऑफिस और सर्राफा प्रतिष्ठान भी शामिल
उझानी। शॉपिंग कॉम्पलेक्स में यूं तो सिलाई-कढ़ाई और रोजमर्रा इस्तेमाल की वस्तु की दुकानें हैं, लेकिन ज्यादातर प्रतिष्ठान सर्राफा व्यापारियों के हैं। इंडेन गैस का बुकिंग ऑफिस भी कॉम्पलेक्स में है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में गैस उपभोक्ताओं की भीड़ भी नजर आती है। ऐसे में अगर हादसा हुआ तो जानमाल का भारी नुकसान भी होगा।