विधान परिषद के चुनाव को मतदान शुरू होने से ऐन वक्त पहले मजिस्ट्रेट के कहने पर पुलिस को व्यवस्थाओं में परिवर्तन करना पड़ गया। पुलिस ने बैरियर भी दोनों ओर आगे तक बढ़ा दिया। जिसकी वजह से स्टेशन रोड पर आवागमन प्रभावित रहा। पालिका गेट के पास सपा के पंडाल भी हटवा दिया गया।
मतदान से पहले बुधवार शाम को समाजवादी पार्टी की ओर से पालिका गेट के पास और पूर्व राज्यमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल की सामने पंडाल लगा गया था। जबकि घंटाघर चौराहे वाले छोर पर भाजपा प्रत्याशी के समर्थकों ने मतदाताओं को पर्चियां मुहैया कराने के लिए शिविर लगाया था। सपा का पांडाल के पांडाल मतदान केंद्र के दो सौ मीटर के दायरे में था। मतदान शुरू होने पर सुबह में पहुंचे मजिस्ट्रेट ने इस पर आपत्ति जता दी। उन्होंने पुलिस के जरिए सपा कार्यकर्ता तक सूचना भिजवा कर पंडाल हटवा दिया। इसके बाद बैरियर भी आगे खिसका दिए गए। स्टेशन वाले छोर पर बैरियर पंजाबी कालोनी लिंक रोड तो दूसरी तरफ पुरानी मंडी मोड़ पर लगाया गया। पुलिस ने बैरियर वाले रास्ते पर बाइक और कार सवार लोगों को छोड़िए, पैदल निकलने वालों पर भी पाबंदी लगा दी गई। पुलिस ने रामलीला मैदान रोड पर निजी स्कूल में भी बच्चों की छुट्टी करवा दी। बच्चों को बैरंग कर दिया गया।
...पर किसी को भी नहीं दिया रूठने का मौका
विधान परिषद के चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने पहुंचे दंपति ने बड़ी ही चालाकी का परिचय दिया। उसने पर्ची तो भाजपा के शिविर से ली, लेकिन वह सीधे मतदान केंद्र की ओर जाने की बजाय सपा के खेमे की ओर मुड़ गया। बाद में उसने वोट डाला। वोटर दंपति की इस चालाकी को लेकर दोनों प्रत्याशियों के समर्थकों में जबर्दस्त चर्चा रही।
नहीं पड़ा महज एक वोट
नगर पालिका परिषद के मतदान केंद्र पर 167 वोटर थे। सुबह में मतदान प्रक्रिया शुरू हुई तो दोपहर बाद तक सर्वाधिक वोट पड़ गए। दो बजे मतदान करने वाले सदस्यों की संख्या 166 पहुंच गई लेकिन एक वोटर शाम चार बजे तक मतदान केंद्र पर नहीं पहुंचा। एक प्रत्याशी के समर्थकों ने वोटर के परिजनों से भी संपर्क साधा। बाद में पता लगा कि वह तो इस वक्त गैर प्रांत में है।