उझानी। छह लेन बाइपास के निर्माण के लिए चल रहे मिट्टी भराई के काम से नरऊ के तालाब से पहले पालिका का नाला पट गया है। हालांकि अभी खेतों से होकर पानी का निकास तालाब तक बना हुआ है, लेकिन बाइपास की मिट्टी भराई पूरी होने के बाद नाला पूरी तरह बंद हो जाएगा। इससे कस्बे में जलभराव होने का अंदेशा भी बना हुआ है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की देखरेख में मथुरा से बरेली तक छह लेन हाईवे के निर्माण का काम चार चरण में पूरा होना है। तीसरे चरण के काम के दौरान उझानी में बाइपास का निर्माण भी शुरू हो चुका है। बाइपास छतुइया गांव से राजकीय मेडिकल कॉलेज के पहले तक बनना है।
बाइपास निर्माण के लिए एनएचएआई ने पिछले महीने मिट्टी भराई का काम शुरू कराया तो छतुइया से आगे बढ़ते ही नरऊ के पास पालिका का नाला बाइपास के नीचे दब गया। नरऊ तालाब तक पानी का निकास बंद होने से पहले एनएचएआई और नगर पालिका परिषद ने किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार नहीं किया। कस्बे के सुधीर कुमार ने बताया कि नाला बंद हो जाने से बारिश के दौरान काफी दिक्कत होगी।
जल निकासी की व्यवस्था करना पालिका प्रशासन के लिए मुश्किल हो जाएगा। बता दें कि कस्बे की अधिकतर नालियों का पानी नाले के जरिये नरऊ के तालाब में गिरता है।
बुटला में प्रस्तावित है वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
उझानी के नालों का पानी नरऊ के जिस तालाब में गिरता है, जिसे लेकर करीब एक दशक से लोग परेशान हैं। हर साल इलाके के कई किसानों की फसलें तबाह हो जाती हैं। इस समस्या के निदान के लिए नगर पालिका परिषद ने कस्बे के नाले का पानी भैंसोर नदी तक पहुंचाने के विकल्प पर काम शुरू किया था, इसके तहत इलाके के बुटला गांव के पास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाना है। प्लांट जल निगम की शाहजहांपुर यूनिट की देखरेख में बनेगा, लेकिन धनराशि अवमुक्त नहीं होने से अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
नरऊ तालाब से पहले नाले का पानी फिलहाल रोक पाना मुश्किल होगा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बन जाने के बाद ही समस्या का समाधान होगा, लेकिन मिट्टी भराई के दौरान अगर नाला बंद हो जाता है तो समस्या बढ़ेगी। इसे लेकर एनएचएआई के अफसरों से वार्ता कर जल निकासी के लिए वैकल्पिक रास्ता खोज लेंगे।
- अब्दुल शबूर, ईओ, नगर पालिका परिषद